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Bihar बिहार: उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति गिरिधारी लाल साहू के हालिया बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद रमा देवी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपनी भाषा और शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए। रमा देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “किसी को भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने से पहले सोचना चाहिए। राजनीति में मर्यादा और शालीनता बेहद जरूरी है। इस तरह के बयान न सिर्फ व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं।”
पूर्व सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन उसका तरीका सभ्य और सम्मानजनक होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेताओं और उनके परिजनों को भी यह समझना चाहिए कि उनके शब्दों का असर समाज पर पड़ता है। हालांकि गिरिधारी लाल साहू के बयान को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस टिप्पणी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी बयान की आलोचना करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
रमा देवी ने कहा कि आज के समय में राजनीति पहले से ही काफी तनावपूर्ण हो चुकी है, ऐसे में इस तरह की बयानबाजी माहौल को और खराब करती है। उन्होंने अपील की कि सभी राजनीतिक दल और नेता संवाद में संयम और सम्मान बनाए रखें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश में राजनीति से जुड़े बयान सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए तेजी से फैलते हैं। ऐसे में जिम्मेदार पदों से जुड़े लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर या सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों पर टिप्पणी करते समय विशेष सतर्कता की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि भाषा की मर्यादा बनाए रखना ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में नई बहस छिड़ गई है कि क्या नेताओं के परिजनों की बयानबाजी पर भी राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई लोगों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े किसी भी व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। फिलहाल, रेखा आर्या या उनके पति की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन रमा देवी के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस तरह की भाषा को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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