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लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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21 Oct 2026 4:42 PM IST
लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को मिला राष्ट्रीय सम्मान
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रोहतास। भारतीय लोक संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली चर्चित लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान लोक संगीत की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की दिशा में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है। मनीषा श्रीवास्तव लंबे समय से भोजपुरी लोकगीतों, पारंपरिक गायन शैलियों और लोक-सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए कार्य कर रही हैं। उनके गायन में सोहर, विवाह गीत, कजरी, चैता और निर्गुण जैसी विधाओं के साथ महिलाओं के जीवन और सामाजिक परंपराओं से जुड़े लोकगीतों को विशेष स्थान मिलता है।

लोक संगीत के क्षेत्र में योगदान को मिली पहचान

मनीषा श्रीवास्तव को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया जाना लोक संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संगीत नाटक अकादमी भारतीय संगीत, नृत्य और नाट्य कलाओं के संरक्षण तथा प्रोत्साहन के लिए कार्य करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय संस्था है।

अकादमी द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार युवा कलाकारों की प्रतिभा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता प्रदान करता है।

मनीषा श्रीवास्तव ने भोजपुरी लोक संगीत की विभिन्न पारंपरिक विधाओं को अपनी प्रस्तुतियों का हिस्सा बनाया है।

उनके प्रयास लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनकी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

भोजपुरी लोकगीतों को समर्पित रहा सफर

भोजपुरी लोक संगीत उत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसमें जन्म, विवाह, ऋतु परिवर्तन, त्योहार और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक गीत शामिल हैं।

मनीषा श्रीवास्तव लंबे समय से इसी लोक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही हैं।

उनके गायन में पारंपरिक गीतों की मूल भावना और सांस्कृतिक संदर्भों को महत्व दिया जाता है।

लोक संगीत की इन विधाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक परंपराओं की झलक मिलती है।

सोहर गीतों की परंपरा को दिया महत्व

मनीषा श्रीवास्तव के गायन में सोहर गीतों का विशेष स्थान है।

सोहर भोजपुरी सहित उत्तर भारत की कई लोक परंपराओं में बच्चे के जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले गीत हैं।

इन गीतों में परिवार की खुशी, शुभकामनाएं और सामाजिक रीति-रिवाज अभिव्यक्त होते हैं।

परंपरागत रूप से महिलाओं की सामूहिक गायन परंपरा में सोहर का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

मनीषा श्रीवास्तव ने इस विधा को अपनी लोक संगीत प्रस्तुतियों में शामिल कर इसकी सांस्कृतिक पहचान को महत्व दिया है।

ऐसे गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सामाजिक स्मृतियों का भी हिस्सा हैं।

विवाह गीतों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत

भोजपुरी समाज में विवाह के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों की समृद्ध परंपरा रही है।

इन गीतों में विवाह की विभिन्न रस्मों, पारिवारिक संबंधों और भावनाओं का वर्णन मिलता है।

मनीषा श्रीवास्तव के कार्यों में विवाह गीतों के गायन और प्रस्तुति को भी प्रमुख स्थान मिला है।

विवाह गीतों के माध्यम से समाज की पुरानी परंपराओं और लोकभाषा की अभिव्यक्ति को समझा जा सकता है।

आधुनिक समय में विवाह समारोहों की बदलती शैली के बीच इन पारंपरिक गीतों का संरक्षण सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

कजरी और चैता जैसी विधाओं का संरक्षण

मनीषा श्रीवास्तव के लोक गायन में कजरी और चैता जैसी पारंपरिक विधाएं भी शामिल हैं।

कजरी मुख्य रूप से वर्षा ऋतु और सावन के सांस्कृतिक वातावरण से जुड़ी लोक संगीत की लोकप्रिय शैली है।

इन गीतों में प्रकृति, प्रेम, विरह और मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है।

वहीं, चैता का संबंध चैत्र महीने और वसंत ऋतु की लोक परंपराओं से है।

चैता गीत भोजपुरी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन विधाओं को प्रस्तुत करने से पारंपरिक लोक संगीत की विविधता को जीवित रखने में मदद मिलती है।

निर्गुण गायन को भी दी पहचान

भोजपुरी लोक संगीत में निर्गुण गायन की एक विशिष्ट परंपरा रही है।

निर्गुण गीतों में आध्यात्मिक चिंतन, जीवन के सत्य और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति मिलती है।

यह शैली लोकभाषा के माध्यम से गहरे दार्शनिक विचारों को सरल रूप में प्रस्तुत करती है।

मनीषा श्रीवास्तव ने अपने कार्यों में निर्गुण गायन को भी स्थान दिया है।

इससे उनके लोक संगीत का दायरा केवल पारिवारिक और उत्सवी गीतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक विचारों से भी जुड़ता है।

महिलाओं की लोक परंपराओं पर विशेष ध्यान

मनीषा श्रीवास्तव के कार्यों की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं से जुड़ी लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को प्रमुखता देना है।

भारतीय लोक संगीत में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

कई पारंपरिक गीत पीढ़ियों तक महिलाओं के सामूहिक गायन के माध्यम से ही संरक्षित रहे हैं।

जन्म, विवाह, त्योहार और अन्य पारिवारिक अवसरों पर गाए जाने वाले गीतों में महिलाओं के अनुभव, भावनाएं और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।

इन गीतों की प्रस्तुति के माध्यम से मनीषा श्रीवास्तव लोक संगीत में महिलाओं की सांस्कृतिक भूमिका को सामने लाने का कार्य कर रही हैं।

लोकभाषा और परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास

लोक संगीत किसी भी क्षेत्र की भाषा, बोली और सामाजिक पहचान से गहराई से जुड़ा होता है।

भोजपुरी लोकगीतों में स्थानीय शब्दों, पारंपरिक धुनों और सांस्कृतिक प्रतीकों का व्यापक प्रयोग मिलता है।

इन गीतों का संरक्षण भोजपुरी भाषा और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में भी सहायक है।

मनीषा श्रीवास्तव का कार्य इसी व्यापक सांस्कृतिक उद्देश्य से जुड़ा है।

उनकी प्रस्तुतियां पारंपरिक गायन शैली को महत्व देते हुए लोक संगीत की पहचान बनाए रखने की दिशा में योगदान देती हैं।

युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया जाता है।

यह सम्मान कला के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिभाओं के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान करता है।

मनीषा श्रीवास्तव को मिला यह पुरस्कार उन युवा कलाकारों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है, जो लोक संगीत की पारंपरिक विधाओं में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

आधुनिक संगीत के बढ़ते प्रभाव के बीच लोकगीतों के संरक्षण और प्रस्तुति के लिए समर्पित कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे सम्मान लोक कलाओं के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

भारतीय लोक संगीत की समृद्ध परंपरा

भारत में लोक संगीत की विविधता उसकी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित लोकगीत वहां की भाषा, जीवनशैली और परंपराओं को अभिव्यक्त करते हैं।

भोजपुरी लोक संगीत भी इसी विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

सोहर, कजरी, चैता, निर्गुण और विवाह गीत जैसी विधाएं समाज की सामूहिक स्मृति को संजोए हुए हैं।

इन परंपराओं का संरक्षण केवल संगीत को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उनसे जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को भी जीवित रखना है।

राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा लोक संगीत का गौरव

मनीषा श्रीवास्तव को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार–2025 मिलने से भोजपुरी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन के उनके प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिली है।

यह उपलब्धि पारंपरिक लोक गायन की सांस्कृतिक महत्ता को भी रेखांकित करती है।

मनीषा श्रीवास्तव लंबे समय से सोहर, विवाह गीत, कजरी, चैता, निर्गुण और महिलाओं से जुड़ी लोक परंपराओं को अपनी प्रस्तुतियों में स्थान देती रही हैं। संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान भारतीय लोक संगीत की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के उनके योगदान की महत्वपूर्ण स्वीकृति है।

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