बिहार

बाढ़ ने छीना आशियाना, सड़क किनारे प्लास्टिक के नीचे गुजर रही पीड़ित परिवारों की जिंदगी

Kavita2
16 Sept 2026 12:47 PM IST
बाढ़ ने छीना आशियाना, सड़क किनारे प्लास्टिक के नीचे गुजर रही पीड़ित परिवारों की जिंदगी
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भागलपुर। बाढ़ ने सिर्फ लोगों के घरों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि कई परिवारों की पूरी जीवन व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिन घरों में कभी रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी, आज वही घर पानी में डूबे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि घर पास होने के बावजूद लोग उसमें वापस नहीं लौट पा रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित परिवार अब सड़क किनारे प्लास्टिक की चादर तानकर रहने को मजबूर हैं। यही अस्थायी ठिकाना उनके लिए घर, रसोई और आराम करने की जगह बन गया है। छोटे बच्चों के साथ परिवार दिन और रात इसी मुश्किल हालात में गुजार रहे हैं।

घर डूबे, सड़क बनी नया ठिकाना

बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। घरों में जमा पानी, कीचड़ और खराब सामान के कारण लोग वापस नहीं जा पा रहे हैं।

कई परिवारों का घरेलू सामान पानी में खराब हो चुका है। कपड़े, अनाज, बर्तन और जरूरी सामान या तो बह गए या पूरी तरह खराब हो गए। ऐसे में लोगों के पास रहने के लिए केवल सड़क किनारे बनाया गया अस्थायी आशियाना बचा है।

प्लास्टिक की चादरों के सहारे बनाए गए इन छोटे-छोटे ठिकानों में पूरा परिवार रहने को मजबूर है। बारिश और मौसम की मार के बीच बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।

बच्चों के साथ कठिन हालात में गुजर रहे दिन

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों की देखभाल को लेकर है। खुले में रहने के कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दिन में तेज धूप और रात में ठंड या बारिश से बचने के लिए परिवार प्लास्टिक के नीचे ही रहने को मजबूर हैं। सीमित जगह में खाना बनाना, सोना और बच्चों की देखभाल करना बेहद मुश्किल हो गया है।

कई परिवारों का कहना है कि घर पास होने के बावजूद वे वहां नहीं जा सकते, क्योंकि अंदर अभी भी पानी और गंदगी मौजूद है।

भोजन की व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती

बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या भोजन की है। कई लोगों का कहना है कि शुरुआत में कुछ दिनों तक राहत सामग्री मिली, लेकिन इसके बाद नियमित भोजन की व्यवस्था नहीं हो सकी।

कुछ परिवारों को केवल दो से चार दिन तक ही तैयार भोजन मिल पाया। इसके बाद उन्होंने खुद राशन जुटाकर सड़क किनारे खाना बनाना शुरू किया।

लोग किसी तरह लकड़ी या अन्य साधनों से चूल्हा जलाकर भोजन तैयार कर रहे हैं। लेकिन लगातार चल रही परेशानी के बीच हर दिन खाने का इंतजाम करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

राहत और पुनर्वास की जरूरत

बाढ़ के बाद केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक पुनर्वास की जरूरत होती है। प्रभावित परिवारों को रहने की सुरक्षित जगह, भोजन, पीने का पानी, स्वास्थ्य सुविधा और जरूरी सामान की आवश्यकता होती है।

सड़क किनारे रह रहे लोगों के लिए स्वच्छता भी एक बड़ी समस्या बन रही है। खुले में रहने के कारण बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने चुनौती है कि प्रभावित लोगों तक लगातार मदद पहुंचाई जाए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।

सामान खत्म, बची सिर्फ उम्मीद

बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि पानी ने उनके घरों के साथ-साथ उनकी मेहनत की कमाई को भी नुकसान पहुंचाया है। कई परिवारों के पास अब रोजमर्रा की जरूरतों का सामान तक नहीं बचा है।

कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने वर्षों में जो सामान जुटाया था, वह कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गया। अब वे दोबारा जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।

सड़क किनारे रहने वाले परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हालात जल्द सामान्य हों और वे फिर से अपने घरों में लौट सकें।

बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ी परेशानी

बाढ़ प्रभावित शिविरों और अस्थायी ठिकानों में रहने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

खुले में रहने से सुरक्षा, स्वास्थ्य और साफ-सफाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ जाती हैं। महिलाओं के लिए अस्थायी व्यवस्था में रोजमर्रा के काम करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

बुजुर्गों और बीमार लोगों को दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होती है, लेकिन बाढ़ के बाद कई इलाकों में इन सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं है।

जिंदगी फिर पटरी पर लाने की कोशिश

बाढ़ ने इन परिवारों को भले ही सड़क पर ला दिया है, लेकिन लोग धीरे-धीरे हालात से लड़ते हुए जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

कोई खराब हुए सामान को ठीक करने में जुटा है तो कोई नए सिरे से रोजी-रोटी शुरू करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसके लिए उन्हें प्रशासन और समाज से मदद की जरूरत है।

बाढ़ प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित आवास, पर्याप्त भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

खत्म नहीं हुई मुश्किलें

बाढ़ का पानी भले ही कई जगहों से कम हो गया हो, लेकिन प्रभावित परिवारों की परेशानियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। घर टूटे हैं, सामान बर्बाद हुआ है और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है।

प्लास्टिक की चादर के नीचे गुजर रही यह जिंदगी बताती है कि प्राकृतिक आपदा का असर केवल उस समय तक नहीं रहता जब पानी बढ़ता है, बल्कि उसके बाद भी लंबे समय तक लोगों को संघर्ष करना पड़ता है।

अब जरूरत है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान भी मिले, ताकि वे फिर से अपने घरों और सामान्य जीवन में लौट सकें।

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