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पितृपक्ष मेले में टूटा भीड़ का रिकॉर्ड
गयाजी: बिहार के गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी है। मंगलवार, 6 अक्टूबर तक 37 लाख 50 हजार से अधिक तीर्थयात्री, श्रद्धालु और पिंडदानी गयाजी पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान और तर्पण किया। इस बार की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक बताई जा रही है।
पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट सहित विभिन्न पिंडवेदियों पर श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार मेले की खास बात विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी भी रही है। रूस, यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्राजील समेत कई देशों से लोग गयाजी पहुंचे हैं। रूस और यूक्रेन से आए श्रद्धालुओं ने भी एक साथ पिंडदान और तर्पण किया। 8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से भी श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है।
पितृपक्ष मेले के शुरुआती दिनों से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दे रही थी। पहले दिन देवघाट पर ही करीब दो लाख लोगों ने पिंडदान किया था। इसके बाद रोजाना बड़ी संख्या में तीर्थयात्री गयाजी पहुंचते रहे। नौ दिनों में श्रद्धालुओं का आंकड़ा 32 लाख से अधिक पहुंच गया था और अब यह 37.50 लाख को पार कर चुका है।
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और ठहरने की व्यापक व्यवस्था की है। मेले में आने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर, नियंत्रण कक्ष और खोया-पाया केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अब तक 1.12 लाख से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि 852 लोगों को खोया-पाया केंद्र के माध्यम से सहायता मिली है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए टेंट सिटी की व्यवस्था भी की गई है। यहां अब तक 11 हजार से अधिक लोग ठहर चुके हैं। भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों के बिछड़ने की स्थिति से निपटने के लिए 10 हजार से ज्यादा पहचान रिस्टबैंड वितरित किए गए हैं।
इस बार प्रशासन ने तकनीक का भी इस्तेमाल किया है। अलग-अलग भाषाओं में आने वाले श्रद्धालुओं की मदद के लिए AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा शुरू की गई है। अब तक 84 हजार से अधिक लोग इस सुविधा का उपयोग कर चुके हैं। इससे खास तौर पर विदेशी यात्रियों को स्थानीय जानकारी और धार्मिक प्रक्रिया समझने में मदद मिल रही है। मेले में पर्यावरण संरक्षण को भी धार्मिक आस्था से जोड़ा गया है। ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान के तहत पितृवाटिका में अब तक 482 पौधे लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गयाजी में पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम ने भी यहां अपने पिता राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। फल्गु नदी, अक्षयवट और विष्णुपद मंदिर को पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इस वर्ष की रिकॉर्ड भीड़ ने गयाजी के धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाई दी है। वर्ष 2025 में करीब 34.79 लाख पर्यटक गयाजी आए थे, जबकि इस वर्ष अकेले पितृपक्ष मेले के दौरान ही 37.50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
स्थानीय प्रशासन का जोर अब शेष दिनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित धार्मिक अनुष्ठान पर है। विष्णुपद मंदिर, देवघाट और अन्य प्रमुख पिंडवेदियों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। गयाजी में इस बार का पितृपक्ष मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में भी उभरता दिखाई दे रहा है। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इसे अब तक के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल कर दिया है।
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