
सहरसा। कोसी क्षेत्र के सहरसा जिले में मत्स्य पालन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। मत्स्य विभाग की योजनाओं और सरकारी अनुदान का लाभ मिलने के बाद जिले में मछली उत्पादन का दायरा लगातार विस्तारित हो रहा है। पिछले पांच वर्षों में जिले में 139 हेक्टेयर नए तालाबों का निर्माण हुआ है, जिसके बाद अब कुल 1168 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन किया जा रहा है।
जिले में अब रेहु, कतला, नैनी, ग्रास कार्प, पंगेसियस के साथ-साथ झींगा मछली का भी उत्पादन किया जा रहा है। इससे स्थानीय मत्स्य पालकों को रोजगार और आय का नया साधन मिला है। मत्स्य विभाग के प्रयासों के कारण पिछले पांच वर्षों में जिले में करीब 5 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सहरसा और आसपास का कोसी क्षेत्र लंबे समय से जल संसाधनों के लिए जाना जाता है। यहां मछली पालन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। पहले सरकारी सहायता और तकनीकी जानकारी के अभाव में लोग इस क्षेत्र में पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पा रहे थे, लेकिन अब योजनाओं के माध्यम से किसानों और युवाओं को प्रोत्साहन मिलने लगा है।
3066 लोगों ने अपनाया मत्स्य पालन व्यवसाय
मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं से पिछले पांच वर्षों में 3066 लोगों ने अनुदान प्राप्त कर मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। बड़ी संख्या में लोग अब पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन को भी आय का जरिया बना रहे हैं।
विभाग के अनुसार, वर्ष 2020-21 में 149 लाभुकों को अनुदान दिया गया। इस दौरान कुल 88.60 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की गई। इसके बाद वर्ष 2021-22 में 498 लोगों को 82.14 लाख रुपये का अनुदान मिला।
वर्ष 2022-23 में मत्स्य पालन योजना के तहत 837 लोगों को लाभ दिया गया और 309.332 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। वहीं वर्ष 2023-24 में 769 लाभुकों को 540.25 लाख रुपये का अनुदान मिला। वर्ष 2024-25 में 516 लोगों को 342.04 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।
झींगा उत्पादन से बढ़ रही उम्मीद
सहरसा जिले में झींगा मछली का उत्पादन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। मत्स्य पालकों का मानना है कि झींगा पालन से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। विभाग भी झींगा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी क्षेत्र में जल उपलब्धता और प्राकृतिक परिस्थितियां मछली पालन के लिए काफी अनुकूल हैं। अगर किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार की बेहतर सुविधा मिलती रही तो यह क्षेत्र मत्स्य उत्पादन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
सरकारी योजनाओं से बढ़ा लोगों का भरोसा
मत्स्य विभाग की योजनाओं में तालाब निर्माण, मछली बीज उपलब्ध कराना और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के कारण जिले के युवाओं और किसानों का रुझान मत्स्य पालन की ओर बढ़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले मछली पालन को केवल छोटे स्तर का काम माना जाता था, लेकिन अब यह एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में सामने आ रहा है। कई लोग इससे अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
मत्स्य विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में सहरसा में मछली उत्पादन की क्षमता और बढ़ सकती है। क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों और सरकारी योजनाओं के बेहतर इस्तेमाल से यह इलाका मत्स्य उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
कई जानकारों का कहना है कि सहरसा में मत्स्य पालन की संभावनाएं आंध्र प्रदेश जैसे बड़े मत्स्य उत्पादक राज्यों से भी बेहतर हो सकती हैं। जरूरत है कि किसानों को लगातार प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
फिलहाल जिले में बढ़ता मछली उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है और हजारों परिवारों के लिए रोजगार का नया माध्यम बन रहा है। आने वाले समय में मत्स्य पालन सहरसा की समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।





