बिहार

Didarganj अग्निकांड के बाद पटना में औद्योगिक इकाइयों का फायर ऑडिट शुरू, 27 टीमें तैनात

Kavita2
29 Jun 2026 6:01 PM IST
Didarganj अग्निकांड के बाद पटना में औद्योगिक इकाइयों का फायर ऑडिट शुरू, 27 टीमें तैनात
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Bihar बिहार: पटना के दीदारगंज स्थित एक तेल फैक्ट्री में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना के बाद जिले की औद्योगिक इकाइयों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच और ऑडिट शुरू कर दिया गया है। इस घटना के बाद प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।

बिहार अग्निशमन सेवा ने इस अभियान के तहत कुल 27 विशेष टीमों को मैदान में उतारा है। ये टीमें चरणबद्ध तरीके से पटना जिले की विभिन्न फैक्ट्रियों, गोदामों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट करेंगी। इस दौरान प्रत्येक इकाई में आग से सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह विशेष अभियान उन औद्योगिक इकाइयों पर विशेष रूप से केंद्रित होगा, जहां ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण या उत्पादन किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से केमिकल, खाद्य तेल, प्लास्टिक, पेंट और अन्य ज्वलनशील सामग्री से जुड़ी फैक्ट्रियां शामिल हैं। इन इकाइयों में आग लगने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए यहां सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी।

जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश पांडेय ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य किसी भी संभावित अग्निकांड की रोकथाम सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि हाल की घटना के बाद यह आवश्यक हो गया है कि सभी औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से परखा जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी फैक्ट्री या गोदाम में अग्नि सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां पाई जाती हैं, तो सबसे पहले संबंधित इकाई को नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस के माध्यम से सुधार के लिए समय सीमा तय की जाएगी, जिसके भीतर कमियों को दूर करना अनिवार्य होगा।

अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी इकाई में अत्यधिक लापरवाही या गंभीर सुरक्षा उल्लंघन पाया जाता है, तो आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसमें संचालन पर रोक लगाने जैसी सख्त कार्रवाई शामिल हो सकती है।

दीदारगंज में हुए तेल फैक्ट्री अग्निकांड ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने इसे चेतावनी के रूप में लेते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा समीक्षा का निर्णय लिया है।

टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक इकाई का विस्तृत निरीक्षण करें और फायर एक्सटिंग्विशर, पानी की उपलब्धता, इमरजेंसी एग्जिट, अलार्म सिस्टम और कर्मचारियों की सुरक्षा प्रशिक्षण स्थिति का भी आकलन करें।

इस अभियान के दौरान औद्योगिक इकाइयों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे नियमित रूप से सुरक्षा अभ्यास (मॉक ड्रिल) करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

अग्निशमन विभाग का मानना है कि तेजी से बढ़ते औद्योगिक विस्तार के बीच सुरक्षा मानकों का पालन और भी जरूरी हो गया है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री का उपयोग या भंडारण होता है।

इस पूरे अभियान को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा ताकि किसी भी इकाई को छोड़ा न जाए। पहले चरण में उच्च जोखिम वाली फैक्ट्रियों की जांच की जा रही है, जिसके बाद अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाएगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करना है ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके।

फिलहाल 27 टीमें लगातार विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण कार्य में जुटी हुई हैं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इस कदम से औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों में सुधार होगा और संभावित दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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