बिहार

कृषि यांत्रिकीकरण योजना से किसानों को फायदा, खुलेंगे नए सेंटर

Kavita2
4 Nov 2026 4:22 PM IST
कृषि यांत्रिकीकरण योजना से किसानों को फायदा, खुलेंगे नए सेंटर
x

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए महंगे कृषि यंत्र खरीदने की मजबूरी नहीं होगी। आधुनिक तकनीक से खेती को बढ़ावा देने और किसानों की उत्पादन लागत कम करने के उद्देश्य से जिले के औराई प्रखंड में कृषि यंत्र बैंक स्थापित करने की तैयारी है। इसके माध्यम से किसान अपनी जरूरत के अनुसार ट्रैक्टर, रोटावेटर, कंबाइन हार्वेस्टर, सीड ड्रिल और अन्य आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर ले सकेंगे।

कृषि यंत्र बैंक की स्थापना से उन किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके पास खेती के लिए सीमित जमीन है और जो लाखों रुपये खर्च करके आधुनिक मशीनें नहीं खरीद सकते। इसके अतिरिक्त जिले में आठ कस्टम हायरिंग सेंटर और विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की भी योजना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृषि यांत्रिकीकरण योजना के तहत जिले के 1,461 किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए परमिट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक उपकरणों की पहुंच बढ़ाना और खेती को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

दरअसल, खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। खेत की जुताई से लेकर बुआई, सिंचाई, फसल की कटाई और अवशेष प्रबंधन तक विभिन्न कार्यों में मशीनें उपयोगी साबित हो रही हैं। हालांकि, इन उपकरणों की कीमत अधिक होने के कारण छोटे किसानों के लिए इन्हें खरीदना आसान नहीं होता।

कई किसानों के पास इतनी जमीन नहीं होती कि वे अपने लिए ट्रैक्टर या हार्वेस्टर खरीदकर उसका पूरे साल उपयोग कर सकें। ऐसे में मशीन खरीदने पर बड़ी पूंजी खर्च करने के बावजूद उसका पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पाता।

कृषि यंत्र बैंक इसी समस्या का समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया जाता है। यहां उपलब्ध मशीनों को किसान निर्धारित किराये पर लेकर खेती के विभिन्न कार्य कर सकते हैं।

औराई में प्रस्तावित कृषि यंत्र बैंक से किसानों को खेत तैयार करने, बुआई करने और फसल की कटाई जैसे कार्यों में सुविधा मिलने की उम्मीद है। आधुनिक मशीनों की मदद से कम समय में अधिक काम करना संभव होगा।

इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी होगा कि किसानों को केवल जरूरत के समय ही उपकरण का किराया देना पड़ेगा। उन्हें मशीन की पूरी कीमत, मरम्मत और लंबे समय तक रखरखाव का खर्च नहीं उठाना होगा।

विशेष रूप से धान, गेहूं, मक्का और अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है। बुआई और कटाई के मौसम में कृषि यंत्रों की मांग अधिक रहती है। ऐसे समय में मशीनें समय पर उपलब्ध होने से किसानों को कृषि कार्य पूरा करने में मदद मिलेगी।

कृषि विभाग की योजना के तहत जिले में आठ कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का लक्ष्य भी रखा गया है। इन केंद्रों से किसानों को विभिन्न प्रकार के कृषि उपकरण किराये पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

कस्टम हायरिंग सेंटर का मुख्य उद्देश्य कृषि मशीनों का साझा उपयोग बढ़ाना है। इस व्यवस्था में किसान अपनी जरूरत के अनुसार उपकरण बुक कर सकते हैं और तय शुल्क का भुगतान करके उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कृषि यंत्रों के साझा उपयोग से छोटे किसानों की लागत कम होने की संभावना रहती है। इसके अलावा उपकरणों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होने से कृषि क्षेत्र में मशीनों पर किए गए निवेश का बेहतर लाभ मिल सकता है।

विशेष कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए भी उपकरण उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। इन मशीनों की सहायता से किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।

कृषि यांत्रिकीकरण योजना के अंतर्गत किसान व्यक्तिगत रूप से भी अनुदान पर मशीनें खरीद सकते हैं। सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार अलग-अलग कृषि उपकरणों पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

बिहार कृषि विभाग की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए परियोजना लागत का 40 प्रतिशत, अधिकतम चार लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है।

इसी तरह फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए परियोजना लागत का 80 प्रतिशत, अधिकतम आठ लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध हो सकती है। विशेष कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम 12 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।

हालांकि, वास्तविक अनुदान राशि संबंधित योजना, आवेदक की पात्रता और स्वीकृत परियोजना लागत के आधार पर निर्धारित होती है।

कृषि विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन फार्म मैकेनाइजेशन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (OFMAS) पोर्टल पर किसानों और पात्र समूहों के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।

इस पोर्टल के माध्यम से किसान संबंधित योजना का चयन करके आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद विभागीय स्तर पर सत्यापन किया जाता है और पात्र आवेदकों के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया पूरी होती है।

कृषि यंत्र खरीदने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसके बाद अनुदान के दावे की स्वीकृति मिलने पर सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

किसानों के लिए यह समझना आवश्यक है कि परमिट जारी होने का अर्थ तत्काल अनुदान राशि मिलना नहीं है। मशीन की खरीद, आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही अनुदान का भुगतान किया जाता है।

कृषि विभाग ने किसानों को योजना की जानकारी प्राप्त करने और आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करने की सुविधा दी है। इच्छुक किसान स्थानीय कृषि कार्यालय से भी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और मशीनों की उपलब्धता संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कृषि यंत्र बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटरों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। मशीनों के संचालन, मरम्मत, परिवहन और रखरखाव से जुड़े कार्यों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

इसके अतिरिक्त किसान समूह, स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन भी निर्धारित नियमों के तहत ऐसी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

औराई में प्रस्तावित कृषि यंत्र बैंक को कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। यह पहल सफल होती है तो कम जमीन वाले किसान भी उन्नत मशीनों से खेती कर सकेंगे।

फिलहाल किसानों को इन केंद्रों के शुरू होने, किराये की दरों और उपकरणों की उपलब्धता संबंधी विस्तृत जानकारी का इंतजार है। केंद्रों का संचालन शुरू होने के बाद ही किसानों को प्रत्यक्ष रूप से इन सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

बहरहाल, कृषि यंत्र बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटरों की योजना से जिले में खेती की लागत कम करने, समय बचाने और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने की उम्मीद बढ़ी है।

Next Story