बिहार

किसानों ने कहा- जमीन गई तो रोजी-रोटी जाएगी

Saba Naaz
16 July 2026 5:01 PM IST
किसानों ने कहा- जमीन गई तो रोजी-रोटी जाएगी
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नवादा। बिहार की प्रस्तावित नवादा-पावापुरी रेल परियोजना को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच मतभेद बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को पावापुरी स्थित गांव मंदिर में आयोजित जनसुनवाई में परियोजना से प्रभावित किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच घंटों बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। किसानों ने उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध करते हुए रेल मार्ग में बदलाव की मांग दोहराई।

जनसुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से परियोजना से होने वाले संभावित लाभों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि नवादा-पावापुरी रेल परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन को भी नई गति मिल सकती है। प्रशासन का कहना था कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक फायदा मिलेगा।

वहीं, किसानों ने प्रशासन की दलीलों पर असहमति जताई। उनका कहना था कि विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि छीनी जा रही है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। किसानों ने कहा कि खेती उनकी रोजी-रोटी का मुख्य आधार है और जमीन जाने के बाद उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

प्रभावित किसानों ने कहा कि वे रेल परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसका रास्ता ऐसा होना चाहिए जिससे किसानों की उपजाऊ जमीन कम से कम प्रभावित हो। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रस्तावित रेल मार्ग में बदलाव किया जाए और वैकल्पिक रास्ते पर विचार किया जाए।

जनसुनवाई में किसानों ने अपनी समस्याएं और आपत्तियां अधिकारियों के सामने रखीं। कई किसानों ने मुआवजा, पुनर्वास और भविष्य की आजीविका को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि केवल आर्थिक मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि खेती से जुड़ी उनकी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया और परियोजना के व्यापक फायदे बताए। अधिकारियों का कहना था कि किसी भी बड़े विकास कार्य के लिए कुछ चुनौतियां आती हैं, लेकिन इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा। रेल परियोजना से क्षेत्र में यातायात सुविधाएं बेहतर होंगी और स्थानीय लोगों को नए अवसर मिलेंगे।

हालांकि, किसानों और प्रशासन के बीच लंबी बातचीत के बावजूद कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। बैठक बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई। अब आगे की रणनीति को लेकर प्रशासन और किसानों दोनों की ओर से विचार किया जा रहा है।

नवादा-पावापुरी रेल परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके पूरा होने से नवादा और पावापुरी के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। इससे स्थानीय लोगों को यात्रा सुविधा के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन क्षेत्र में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की चिंता भी लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे किसानों की आजीविका समाप्त हो जाए।

फिलहाल इस परियोजना को लेकर विवाद जारी है। प्रशासन जहां परियोजना को क्षेत्र के विकास का आधार बता रहा है, वहीं किसान अपनी जमीन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और किसानों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।

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