
जमुई। खेतों में लहलहाती फसलों की निगरानी के लिए रविवार सुबह घर से निकले एक बुजुर्ग किसान की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसा सिमुलतला थाना क्षेत्र की टेलवा पंचायत के चरैया गांव स्थित गोड़गोड़नी बहियार में हुआ। खेतों की सिंचाई के लिए बांस-बल्लियों के सहारे खींचा गया खुला बिजली तार अचानक टूटकर जमीन पर गिरा हुआ था। घास के बीच पड़े तार के संपर्क में आते ही 65 वर्षीय किसान नारायण राणा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
घटना रविवार सुबह करीब साढ़े छह बजे की बताई जा रही है। रोज की तरह नारायण राणा नित्यक्रिया और अपनी फसल की निगरानी के लिए बहियार की ओर गए थे। सुबह का समय होने और जमीन पर घास मौजूद रहने के कारण उन्हें टूटा हुआ तार दिखाई नहीं दिया। जैसे ही वह तार के संपर्क में आए, तेज करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
हादसा इतना अचानक हुआ कि किसान को संभलने या मदद के लिए आवाज देने का अवसर नहीं मिला। करंट लगने के कारण वह मौके पर ही गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों की नजर जब उन पर पड़ी तो उन्होंने घटना की सूचना गांव के अन्य लोगों और परिजनों को दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए।
नारायण राणा को जमीन पर पड़े देखकर परिजन उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़े, लेकिन तार में बिजली प्रवाहित होने की आशंका के कारण लोगों को सावधानी बरतनी पड़ी। सुरक्षित तरीके से उन्हें तार से अलग करने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बुजुर्ग किसान की मौत की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
परिजनों ने बताया कि नारायण राणा प्रतिदिन सुबह खेतों की ओर जाते थे। वह अपनी फसल की स्थिति देखते और सिंचाई समेत खेती से जुड़े जरूरी कामों की निगरानी करते थे। रविवार सुबह भी वह इसी उद्देश्य से घर से निकले थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि खेत तक पहुंचने से पहले ही वह खुले बिजली तार की चपेट में आ जाएंगे।
बताया जा रहा है कि गोड़गोड़नी बहियार में खेतों की सिंचाई के लिए बिजली के तार बांस और बल्लियों के सहारे खींचे गए हैं। पर्याप्त ऊंचाई और सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने के कारण ये तार किसानों तथा खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए खतरा बने हुए हैं। इसी व्यवस्था का एक तार टूटकर जमीन पर गिर गया था।
घास के बीच पड़ा तार दूर से दिखाई नहीं दे रहा था। नारायण राणा अनजाने में उसके संपर्क में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली के तारों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार लगाया गया होता तो इस हादसे को रोका जा सकता था।
घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली व्यवस्था को लेकर आक्रोश देखा गया। लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सिंचाई के लिए खींचे गए तारों की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई स्थानों पर तार खुले हुए हैं और उन्हें अस्थायी रूप से बांस-बल्लियों के सहारे लगाया गया है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग और संबंधित व्यवस्था पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि खेतों में बिजली आपूर्ति के लिए सुरक्षित लाइन और उचित खंभों की व्यवस्था होनी चाहिए। जमीन के नजदीक लटकते या टूटकर गिरे तारों की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
हालांकि बिजली तार किस व्यक्ति ने खींचा था, वह किस कनेक्शन से जुड़ा था और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी, असुरक्षित कनेक्शन या किसी अन्य कारण से हुआ।
घटना की सूचना सिमुलतला थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर घटना से संबंधित जानकारी जुटा रही है। मृतक के परिजनों और आसपास मौजूद ग्रामीणों से पूछताछ कर हादसे की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
शव को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की तैयारी की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के चिकित्सकीय कारण की पुष्टि होगी। हालांकि प्रारंभिक रूप से किसान की मौत बिजली का करंट लगने से होने की बात सामने आई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मृत किसान के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि नारायण राणा खेती के काम से जुड़े थे और उनकी अचानक मौत से परिवार पर गहरा संकट आ गया है। लोगों ने घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या विभाग की पहचान कर कार्रवाई की मांग भी उठाई।
हादसे के बाद बहियार में मौजूद खुले तारों और अस्थायी बिजली व्यवस्था की जांच की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल एक स्थान का तार हटाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। पूरे क्षेत्र में बांस-बल्लियों के सहारे खींचे गए तारों की जांच कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।
खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग आम है, लेकिन असुरक्षित तरीके से खींची गई लाइन जानलेवा साबित हो सकती है। तार जमीन से पर्याप्त ऊंचाई पर नहीं होने या कमजोर सहारे पर टिके रहने से हवा, बारिश या किसी अन्य कारण से टूटकर गिर सकते हैं।
गीली मिट्टी और घास के बीच बिजली का तार गिरने पर करंट फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में तार को छूने से पहले बिजली आपूर्ति बंद कराना आवश्यक होता है। ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र के किसानों को भी बिजली सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाए।
नारायण राणा की मौत ने खेतों तक बिजली पहुंचाने की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। किसान सिंचाई और फसल की देखभाल के लिए नियमित रूप से बहियार जाते हैं। वहां खुले तार मौजूद होने से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि इस घटना को सामान्य दुर्घटना मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि तार कब टूटा था तथा बिजली की आपूर्ति बंद क्यों नहीं हुई। जिम्मेदारी तय होने के बाद उचित कदम उठाने की मांग की गई है।
बुजुर्ग किसान की मौत के बाद चरैया गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण मृतक के परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं। खेती और परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाले नारायण राणा की अचानक मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
फिलहाल सिमुलतला पुलिस घटना की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है। बिजली विभाग की ओर से हादसे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही तार के स्रोत, कनेक्शन की वैधता और लापरवाही के लिए जिम्मेदार पक्ष की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
रविवार सुबह हुआ यह हादसा खेतों में बिजली के सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता को फिर सामने लाता है। फसल की निगरानी के लिए निकले किसान की जान एक टूटे खुले तार ने ले ली। अब ग्रामीण चाहते हैं कि ऐसी व्यवस्था सुधारी जाए ताकि किसी अन्य किसान या मजदूर को इसी तरह अपनी जान न गंवानी पड़े





