
भोजपुर: बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत के मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मृतक के स्वजन अब न्याय की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। परिजनों ने ऐलान किया है कि वे 25 जुलाई को भोजपुर के एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि मामले में नामजद दोषी पुलिसकर्मियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए और भरत तिवारी का मोबाइल फोन परिवार को वापस सौंपा जाए।
मृतक भरत भूषण तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने बताया कि घटना के बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में नामजद पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी की जा रही है, जिससे परिवार में नाराजगी बढ़ रही है।
चंदन तिवारी के अनुसार, भरत तिवारी का मोबाइल फोन भी अभी तक परिजनों को नहीं दिया गया है। परिवार का कहना है कि मोबाइल में महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है, जो पूरे मामले की जांच में मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि पुलिस जल्द से जल्द मोबाइल फोन परिवार को सौंपे।
परिजनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। 25 जुलाई को आरा स्थित भोजपुर एसपी कार्यालय के सामने प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में परिवार के सदस्य और समर्थक शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
परिजनों का कहना है कि भरत तिवारी की मौत से जुड़ी पूरी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि बिना उचित कार्रवाई के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर हो रही है।
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए और अगर किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस विभाग की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने और जांच प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही जाती रही है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब 25 जुलाई का प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाएंगे, लेकिन न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने भी चुनौती होगी कि वह मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे और परिवार की शिकायतों का समाधान निकाले।





