बिहार

10 बार फेल फिर 11वीं कोशिश में बने लेफ्टिनेंट

Kavita2
5 Sept 2026 3:20 PM IST
10 बार फेल फिर 11वीं कोशिश में बने लेफ्टिनेंट
x

नवादा। असफलता के आगे घुटने टेक देना आसान है, लेकिन असफलता को अपनी ताकत बनाकर मंजिल तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं होती। बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के डोहरा गांव निवासी विजेता विशाल ने इसी जज्बे और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की है। भारतीय सेना में अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि लगातार 10 बार असफलता का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर असफल प्रयास के बाद खुद को और बेहतर बनाने में जुटे रहे। आखिरकार 11वें प्रयास में उन्हें सफलता मिली और वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए।

विशाल की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे डोहरा गांव और नारदीगंज क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं या चयन प्रक्रियाओं में बार-बार असफल होने के बाद अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।

सेना में अधिकारी बनने का था सपना

विजेता विशाल बचपन से ही भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देखते थे। सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का उनका लक्ष्य धीरे-धीरे उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य बन गया। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने मेहनत शुरू की और अधिकारी चयन की प्रक्रिया में शामिल हुए।

सेना में अधिकारी बनने की राह आसान नहीं होती। लिखित परीक्षा के बाद सर्विस सेलेक्शन बोर्ड यानी SSB की प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की मानसिक क्षमता, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, व्यक्तित्व और टीम भावना समेत कई पहलुओं को परखा जाता है। विशाल भी इस कठिन प्रक्रिया से गुजरे, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली।

10 बार मिली असफलता

विशाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार मिलने वाली असफलता थी। SSB के साक्षात्कार में उन्हें लगातार 10 बार असफलता का सामना करना पड़ा। किसी भी युवा के लिए इतनी बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलना हौसला तोड़ने वाला हो सकता है। कई लोग ऐसी स्थिति में अपना लक्ष्य बदल देते हैं या प्रयास करना छोड़ देते हैं।

लेकिन विशाल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने हर असफलता को अपनी कमियों को पहचानने का अवसर माना। प्रत्येक प्रयास के बाद उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि कहां सुधार की जरूरत है। उन्होंने अपनी तैयारी, व्यक्तित्व और प्रदर्शन को बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित किया।

लगातार असफल होने के बावजूद उनके भीतर सेना में अधिकारी बनने का सपना कमजोर नहीं हुआ। बल्कि हर असफल प्रयास ने उनके संकल्प को और मजबूत किया। यही दृढ़ता आखिरकार उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

11वें प्रयास में बदली तस्वीर

लगातार 10 असफलताओं के बाद विशाल ने 11वीं बार SSB में हिस्सा लिया। इस बार उनकी मेहनत और अनुभव दोनों उनके साथ थे। पिछले प्रयासों से मिली सीख को उन्होंने अपनी तैयारी में शामिल किया। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार वह मौका आया, जिसका उन्हें इंतजार था।

11वें प्रयास में विशाल ने SSB की चुनौती पार कर ली। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मंजिल कितनी भी कठिन क्यों न हो, लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के सामने असफलता ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती।

SSB में सफल होने के बाद उनके सेना में लेफ्टिनेंट बनने का रास्ता साफ हुआ। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयन उनके वर्षों के संघर्ष और मेहनत का परिणाम है।

गांव में खुशी का माहौल

विशाल की सफलता की खबर डोहरा गांव पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने उनकी उपलब्धि पर बधाई दी और इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया। परिवार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि विशाल ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।

ग्रामीणों के बीच उनकी कहानी की चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि किस तरह उन्होंने लगातार 10 बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। उनकी सफलता को युवाओं के लिए उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।

असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी

विशाल की कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि असफलता किसी लक्ष्य का अंत नहीं होती। असफलता यह बताती है कि अभी तैयारी में कुछ कमी है और उसे दूर करने की जरूरत है। उन्होंने भी अपनी असफलताओं को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने की सीढ़ी बना लिया।

लगातार 10 बार असफल होने के बाद 11वीं कोशिश में सफल होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह सफलता बताती है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या चयन प्रक्रिया में धैर्य और निरंतरता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं में एक सीट के लिए हजारों युवा प्रयास करते हैं, ऐसे समय में विशाल की कहानी खास संदेश देती है। कई बार एक-दो असफल प्रयास के बाद अभ्यर्थी निराश हो जाते हैं। लेकिन विशाल ने दिखाया कि असफलता की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति हर बार उससे क्या सीखता है।

उनकी सफलता युवाओं को यह संदेश देती है कि लक्ष्य बड़ा हो तो रास्ते में आने वाली असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। तैयारी में सुधार, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास के साथ कठिन से कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।

विजेता विशाल की कहानी सिर्फ एक युवक के सेना में लेफ्टिनेंट बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी है। 10 बार मिली असफलता के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा और 11वें प्रयास में उसे हकीकत में बदल दिया। अब भारतीय सेना की वर्दी में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू होगी। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में क्षेत्र के युवाओं को मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करती रहेगी।

Next Story