
बिहार : कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में करीब डेढ़ दशक से बंद पड़े खनन कार्य के दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है। खनन गतिविधियों को शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पहले चरण में करवंदिया और गिजवाही मौजा समेत चार ब्लॉकों में खनन शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि खनन शुरू होने की अंतिम समयसीमा और नीलामी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक घोषणा अभी सामने आनी बाकी है।
दो दिन पहले खनन विकास को लेकर हुई विशेष बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जिले के कई विधायकों ने खदानों की नीलामी बड़े क्षेत्र के बजाय छोटे-छोटे खंडों में करने का सुझाव दिया। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि छोटे खंडों में खदानों का बंदोबस्त होने से स्थानीय स्तर पर ज्यादा लोगों को इस कारोबार से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
चार ब्लॉकों से शुरुआत की तैयारी
प्रारंभिक योजना के अनुसार, खनन कार्य को एक साथ पूरे पहाड़ी क्षेत्र में शुरू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में करवंदिया और गिजवाही मौजा सहित चार ब्लॉकों को शामिल करने की तैयारी है।
इन क्षेत्रों में खनन शुरू करने से पहले आवश्यक प्रशासनिक, पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू हो सकेंगी।
लंबे समय से खनन बंद रहने के कारण इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कारोबार पर भी असर पड़ा है। ऐसे में खनन दोबारा शुरू होने की संभावना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेष बैठक में हुई चर्चा
दो दिन पूर्व खनन विकास को लेकर आयोजित विशेष बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच खदानों के संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में मौजूद विधायकों ने जिलाधिकारी के समक्ष खदानों की नीलामी छोटे-छोटे खंडों में करने की बात रखी। उनका कहना था कि यदि बड़े क्षेत्र को एक ही इकाई बनाकर नीलाम किया जाता है तो बड़ी कंपनियों का दबदबा बढ़ सकता है और स्थानीय स्तर के छोटे कारोबारी इस प्रक्रिया में पीछे रह सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से खदानों को छोटे ब्लॉकों में बांटकर नीलामी की प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया है।
छोटे खंडों में बंदोबस्त की मांग
विधायकों का मानना है कि छोटे-छोटे खंडों में पत्थर खदानों का बंदोबस्त होने से अधिक संख्या में स्थानीय कारोबारी नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। इससे खनन व्यवसाय केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा।
छोटे खंडों में नीलामी होने पर स्थानीय स्तर के ऐसे लोग भी कारोबार से जुड़ सकते हैं, जिनके पास बड़े खनन क्षेत्र के संचालन के लिए पर्याप्त पूंजी या संसाधन नहीं हैं।
हालांकि खदानों को कितने क्षेत्रफल के खंडों में बांटा जाएगा और नीलामी की शर्तें क्या होंगी, इसका अंतिम फैसला संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत किया जाएगा।
रोजगार बढ़ने की उम्मीद
कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में खनन गतिविधियां दोबारा शुरू होने की स्थिति में स्थानीय रोजगार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पत्थर खनन से केवल खदान में काम करने वाले श्रमिक ही नहीं, बल्कि परिवहन, मशीनरी, मरम्मत, ढुलाई और अन्य सहायक कारोबार भी जुड़े होते हैं।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई तो खनन शुरू होने का आर्थिक लाभ आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। बड़ी संख्या में श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से बंद खनन कारोबार के कारण इससे जुड़े कई लोगों को दूसरे रोजगार की तलाश करनी पड़ी थी। अब गतिविधियां शुरू होने की संभावना से उनके बीच भी उम्मीद बढ़ी है।
बड़ी कंपनियों को लेकर विधायकों ने जताई चिंता
बैठक में विधायकों ने बड़ी कंपनियों की संभावित भागीदारी को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि यदि खदानों की नीलामी बहुत बड़े खंडों में की जाती है तो बड़ी कंपनियां ही आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगी।
जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि ऐसी स्थिति में स्थानीय कारोबारियों की भागीदारी सीमित हो सकती है। हालांकि बड़ी कंपनियों की भागीदारी से स्थानीय लोग रोजगार से वंचित ही रहेंगे, यह फिलहाल जनप्रतिनिधियों की आशंका है और इसका वास्तविक प्रभाव नीलामी की शर्तों तथा रोजगार नीति पर निर्भर करेगा।
इसी कारण विधायकों ने ऐसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की है जिसमें स्थानीय लोगों और छोटे कारोबारियों को भी पर्याप्त अवसर मिल सके।
डेढ़ दशक से बंद है खनन
कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में करीब 15 वर्षों से खनन गतिविधियां बंद बताई जा रही हैं। लंबे अंतराल के बाद प्रशासन की ओर से दोबारा खनन शुरू करने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खनन बंद होने के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था के उस हिस्से पर असर पड़ा जो पत्थर कारोबार और उससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर था। खनन दोबारा शुरू होने पर पत्थर कारोबार के साथ मालवाहक वाहनों, स्थानीय बाजार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।
हालांकि लंबे समय बाद खनन शुरू करने की प्रक्रिया में पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
वैधानिक मंजूरियों के बाद ही शुरू होगा काम
खनन गतिविधियां शुरू करने के लिए केवल नीलामी पर्याप्त नहीं होती। संबंधित क्षेत्र के लिए लागू पर्यावरणीय मंजूरी, खनन योजना और अन्य आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना होता है।
ऐसे में प्रारंभिक तैयारी शुरू होने का अर्थ तत्काल खनन शुरू होना नहीं है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही चयनित क्षेत्रों में खनन संभव होगा।
खनन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, पहाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, धूल नियंत्रण और परिवहन व्यवस्था जैसे विषयों पर भी निगरानी की जरूरत होगी।
नीलामी के स्वरूप पर टिकी नजर
अब सबसे ज्यादा नजर खदानों की नीलामी के स्वरूप पर है। विधायकों ने छोटे-छोटे खंड बनाकर बंदोबस्त करने का सुझाव दिया है, जबकि अंतिम निर्णय प्रशासन और संबंधित खनन विभाग को नियमों के अनुसार लेना है।
यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो पहले चरण में करवंदिया और गिजवाही मौजा समेत चार ब्लॉकों में प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके बाद अन्य क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।
फिलहाल डेढ़ दशक से बंद कैमूर पहाड़ी के खनन क्षेत्र में फिर गतिविधियां शुरू होने की संभावना ने स्थानीय कारोबारियों और रोजगार की तलाश कर रहे लोगों की उम्मीद बढ़ा दी है। अब प्रशासन की अगली कार्रवाई, नीलामी की शर्तों और जरूरी मंजूरियों पर यह निर्भर करेगा कि वास्तविक खनन कार्य कब से शुरू हो पाता है।





