
पटना। बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए दरभंगा और मुजफ्फरपुर में दो बड़े औद्योगिक पार्क विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने दोनों परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर और मास्टर प्लान तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव में औद्योगिक पार्कों में होने वाले निवेश, स्थापित की जाने वाली इकाइयों और उनसे पैदा होने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का विवरण शामिल किया गया है।
इन औद्योगिक पार्कों को केंद्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना यानी ‘भाव्या’ के अंतर्गत विकसित करने का प्रस्ताव है। परियोजना को केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद आधारभूत संरचना के विकास और औद्योगिक इकाइयों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दोनों परियोजनाओं में कुल 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित बताया गया है। इससे उत्तर बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
दरभंगा में औद्योगिक पार्क के लिए बहादुरपुर और हनुमाननगर प्रखंडों में करीब 385 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। परियोजना के लिए तरलाही, मोटनाजा, बिहारी मुकुंद और अम्माडीह सहित संबंधित क्षेत्रों में जमीन ली जानी है। राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। सरकारी रिकॉर्ड में दरभंगा परियोजना के लिए 385.45 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण का उल्लेख मिलता है।
मुजफ्फरपुर के पारू अंचल में करीब 700 एकड़ क्षेत्र में दूसरा औद्योगिक पार्क विकसित किया जाना है। इस परियोजना के लिए भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। दोनों प्रस्तावित पार्कों का कुल क्षेत्रफल करीब 1,085 एकड़ होगा। बड़े भूखंड की उपलब्धता से यहां अलग-अलग आकार की औद्योगिक इकाइयों को जगह आवंटित करने और उनके लिए साझा सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रस्ताव के अनुसार, दरभंगा के औद्योगिक पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों से लगभग 32 हजार 900 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। वहीं मुजफ्फरपुर के औद्योगिक पार्क में करीब 59 हजार 600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने का आकलन किया गया है। इन दोनों आंकड़ों का योग 92 हजार 500 होता है। इसलिए उपलब्ध जिलावार आंकड़ों के आधार पर रोजगार का अनुमान 95 हजार से अधिक नहीं, बल्कि 92,500 बनता है। केंद्र को भेजी गई मूल डीपीआर में यदि कोई अतिरिक्त रोजगार श्रेणी शामिल है तभी संख्या 95 हजार से ऊपर हो सकती है। इस अंतर की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि आवश्यक है।
दोनों औद्योगिक पार्कों में ‘प्लग एंड प्ले’ व्यवस्था के आधार पर उद्यमियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इस मॉडल के अंतर्गत उद्योग लगाने वाली कंपनियों को पहले से विकसित भूमि और जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे उद्यमियों को जमीन तैयार करने और बुनियादी ढांचा खड़ा करने में लगने वाला समय कम होता है। सड़क, बिजली, पानी, जल निकासी, भंडारण और अन्य साझा सुविधाएं उपलब्ध होने पर औद्योगिक इकाइयां अपेक्षाकृत कम समय में उत्पादन शुरू कर सकती हैं।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से बड़े निवेशकों के साथ छोटे और मध्यम उद्यम भी आकर्षित होंगे। नई इकाइयों में प्रत्यक्ष रोजगार मिलने के अलावा परिवहन, निर्माण, खानपान, सुरक्षा, पैकेजिंग, रखरखाव और स्थानीय सेवाओं से जुड़े अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे। आसपास के क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से छोटे दुकानदारों, वाहन संचालकों और सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।
दरभंगा और मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार के प्रमुख शहर हैं। दोनों जिलों का आसपास के क्षेत्रों से सड़क और रेल संपर्क है। इन इलाकों में औद्योगिक पार्क विकसित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कुछ हद तक कम हो सकती है। उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई तो तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों तरह के रोजगार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगे।
औद्योगिक पार्कों की स्थापना से किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए भी बाजार की नई संभावनाएं बन सकती हैं। कच्चे माल की खरीद, प्रसंस्करण और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए स्थानीय आपूर्ति शृंखला विकसित होने की उम्मीद है। हालांकि कौन-कौन से उद्योग स्थापित होंगे, इसका अंतिम विवरण निवेशकों के चयन और परियोजना की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल परियोजनाएं प्रस्ताव और भूमि अधिग्रहण के चरण में हैं। रोजगार और निवेश के आंकड़े डीपीआर में लगाए गए अनुमान हैं, वास्तविक उपलब्धि उद्योगों की स्थापना और संचालन शुरू होने के बाद ही सामने आएगी। केंद्र सरकार से मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, आधारभूत संरचना के निर्माण और निवेशकों को भूखंड आवंटित करने में लगने वाला समय भी परियोजनाओं की गति निर्धारित करेगा।
बिहार उद्योग विभाग के रिकॉर्ड में दरभंगा के बहादुरपुर और हनुमाननगर में 385.45 एकड़ तथा मुजफ्फरपुर के पारू में 700 एकड़ भूमि अधिग्रहण संबंधी वित्तीय स्वीकृतियों का उल्लेख है। दरभंगा के लिए स्वीकृत अधिग्रहण राशि में से 47 करोड़ रुपये और पारू परियोजना के लिए 38 करोड़ रुपये की निकासी एवं व्यय से संबंधित आदेश भी दर्ज हैं। भूमि और रोजगार संबंधी ये विवरण सामने आए हैं।
दोनों पार्क समय पर विकसित होते हैं तो उत्तर बिहार में औद्योगिक निवेश का नया केंद्र तैयार हो सकता है। इससे न केवल हजारों रोजगार पैदा होंगे, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, कारोबार और आधारभूत संरचना को भी मजबूती मिलने की संभावना है।





