बिहार

गरीबों पर टैक्स नहीं पंचायतों की आय बढ़ाने पर जोर

Kavita2
21 Sept 2026 1:37 PM IST
गरीबों पर टैक्स नहीं पंचायतों की आय बढ़ाने पर जोर
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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कहा कि राज्य में गरीब लोगों पर किसी तरह का कर (टैक्स) नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से टैक्स वसूलने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व जुटाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गांवों में चल रहे ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और मोबाइल टावर जैसी गतिविधियों से पंचायतें टैक्स प्राप्त कर सकती हैं।

सीएम सम्राट चौधरी होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री के साथ उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख ने किया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाले राजस्व का उपयोग गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पंचायतों की आय बढ़ने से गांवों में कई जरूरी कार्यों को गति दी जा सकती है। इसमें कचरा प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य आम लोगों, खासकर गरीब वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं है। उन्होंने कहा कि गरीबों से टैक्स लेने की कोई योजना नहीं है, लेकिन जिन व्यावसायिक गतिविधियों से आय हो रही है, उनसे पंचायतों को उचित राजस्व प्राप्त करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के साधन विकसित करने होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

‘ग्राम संसद’ कार्यक्रम में पंचायतों की भूमिका, ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के विकास के लिए पंचायतों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जब पंचायतों के पास पर्याप्त संसाधन होंगे तो वे अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार कर उन्हें बेहतर तरीके से लागू कर सकेंगी।

उन्होंने स्थानीय निकायों को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। गांवों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर तेजी से किया जा सकता है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायतों को मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों में किया जाना चाहिए। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और गांवों में सुविधाओं का विस्तार होगा।

कार्यक्रम के दौरान पंचायत व्यवस्था को प्रभावी बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय निकायों की आर्थिक क्षमता बढ़ने से विकास योजनाओं को लागू करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, पंचायत स्तर पर टैक्स व्यवस्था लागू करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों, लोगों की क्षमता और व्यावसायिक गतिविधियों के स्वरूप को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

सरकार का कहना है कि पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय संसाधनों का विस्तार जरूरी है। इसी दिशा में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आय के स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल मुख्यमंत्री के इस बयान को ग्रामीण प्रशासन और पंचायतों की आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पंचायतों को अधिक सक्षम बनाकर गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना बताया जा रहा है।

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