बिहार

समस्तीपुर में करंट लगने से बिजली मिस्त्री की मौत

Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 3:44 PM IST
समस्तीपुर में करंट लगने से बिजली मिस्त्री की मौत
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समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। विभूतिपुर थाना क्षेत्र के सरौली गांव में एक नए मकान में बिजली की वायरिंग करने के दौरान 35 वर्षीय बिजली मिस्त्री संजय दास की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब संजय मकान में बिजली से जुड़ा काम कर रहे थे। इसी दौरान वह अचानक करंट की चपेट में आ गए। उन्हें बचाने के लिए उनका चचेरा भाई पंकज कुमार आगे बढ़ा, लेकिन वह भी बिजली के संपर्क में आ गया। इस घटना से परिवार में मातम पसर गया है और गांव में शोक का माहौल है।
मिली जानकारी के अनुसार, संजय दास बिजली मिस्त्री का काम करते थे। वह सरौली गांव में एक नए मकान में वायरिंग करने पहुंचे थे। काम के दौरान अचानक उन्हें बिजली का जोरदार झटका लगा। करंट की चपेट में आने के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई। मौके पर मौजूद उनके चचेरे भाई पंकज कुमार ने जब संजय को मुसीबत में देखा तो वह उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े। हालांकि, बचाव के प्रयास में पंकज भी करंट की चपेट में आ गए। इस हादसे में संजय की जान चली गई, जबकि पंकज भी प्रभावित हुए।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। बिजली का काम करते समय हुए इस हादसे ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। एक ही परिवार के दो सदस्यों के करंट की चपेट में आने से परिजनों की चिंता बढ़ गई। संजय की मौत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो गया कि रोज की तरह काम पर निकले संजय अब कभी घर वापस नहीं लौटेंगे।
बताया जा रहा है कि संजय दास की उम्र महज 35 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में उनकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आसपास के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। गांव में हादसे की चर्चा हो रही है और लोग मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि संजय को बचाने की कोशिश में उनके चचेरे भाई पंकज कुमार भी हादसे का शिकार हो गए। किसी अपने को संकट में देखकर उसे बचाने की कोशिश करना स्वाभाविक है, लेकिन बिजली के संपर्क में आए व्यक्ति को बिना सुरक्षा उपायों के छूना बेहद खतरनाक हो सकता है। पंकज ने अपने भाई की जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान वह भी करंट की चपेट में आ गए। पंकज की चोटों और उपचार की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि नए मकान में वायरिंग के दौरान बिजली का करंट कैसे पहुंचा। आमतौर पर मकानों में वायरिंग करते समय बिजली की आपूर्ति बंद रखना जरूरी होता है। यदि किसी तार में अचानक करंट आ जाए या कोई खुला तार बिजली के संपर्क में हो, तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है। हालांकि, संजय दास के साथ हुई घटना में करंट लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी पुष्टि नहीं हुई है कि हादसे के समय बिजली की आपूर्ति चालू थी या किसी तकनीकी खराबी के कारण तार में करंट आया।
बिजली से जुड़े काम में छोटी सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेष रूप से नए मकानों में वायरिंग, स्विच बोर्ड लगाने, बिजली के तार जोड़ने और कनेक्शन की जांच करने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। कई बार खुले तार, खराब उपकरण, नमी और अर्थिंग की समस्या भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। ऐसे में काम शुरू करने से पहले बिजली की सप्लाई बंद करना और उचित परीक्षण उपकरणों से करंट की जांच करना आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो उसे सीधे हाथ से छूने के बजाय सबसे पहले सुरक्षित तरीके से बिजली की आपूर्ति बंद करनी चाहिए। बिजली बंद करना संभव नहीं होने पर प्रशिक्षित सहायता बुलानी चाहिए। करंट से प्रभावित व्यक्ति को छुड़ाने के प्रयास में बिना सुरक्षा उपकरणों के आगे बढ़ना दूसरे व्यक्ति के लिए भी जानलेवा हो सकता है। समस्तीपुर की इस घटना में भी एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश के दौरान दूसरे व्यक्ति का
करंट
की चपेट में आना बिजली संबंधी सुरक्षा की गंभीरता को दर्शाता है।
ग्रामीण इलाकों में मकानों के निर्माण और बिजली संबंधी काम के दौरान सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बिजली मिस्त्रियों को भी उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। इंसुलेटेड दस्ताने, सुरक्षित औजार, मजबूत जूते और वोल्टेज जांचने वाले उपकरण हादसों के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकते हैं। इसके साथ ही किसी भी विद्युत कार्य से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संबंधित लाइन पूरी तरह सुरक्षित है।
फिलहाल इस घटना में पुलिस की जांच, शव के पोस्टमार्टम और पंकज कुमार के उपचार को लेकर आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है। हादसे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि संजय दास किस वजह से करंट की चपेट में आए।
सरौली गांव में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बिजली से जुड़े कार्यों में सुरक्षा बरतने की आवश्यकता को सामने ला दिया है। 35 वर्षीय संजय दास की असमय मौत से उनका परिवार गहरे सदमे में है। वहीं, अपने चचेरे भाई को बचाने की कोशिश में पंकज कुमार का करंट की चपेट में आना इस हादसे को और भी दुखद बना देता है।
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