
पटना। बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले हजारों लोग सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अनुदान मद में राशि का आवंटन समय पर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन एक साल से अधिक समय से लंबित बताए जा रहे हैं। समय के साथ नए आवेदन जुड़ने से लंबित मामलों की सूची लगातार बढ़ती जा रही है। अब मामले को लेकर विभागीय अधिकारी सक्रिय हुए हैं और लंबित आवेदनों का पूरा ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार की ओर से खरीदारों को निर्धारित नियमों के तहत वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करने के साथ प्रदूषण में कमी लाना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित करना है। इसी प्रोत्साहन को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे और अनुदान के लिए आवेदन किया।
हालांकि आवेदन करने के बाद कई लोगों को लंबे समय से अनुदान की राशि नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे मुख्य वजह संबंधित मद में राशि का आवंटन नहीं होना है। इसके कारण पात्रता और अन्य प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद कई आवेदन लंबित पड़े हैं।
एक साल से अधिक समय से इंतजार
कई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों के आवेदन एक साल से अधिक समय से लंबित बताए जा रहे हैं। आवेदन करने वाले लोग लगातार अनुदान मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। लेकिन बजट आवंटन में देरी होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इस बीच प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री जारी रहने से अनुदान के लिए नए आवेदन भी आते रहे। पुराने मामलों का निपटारा नहीं होने और नए आवेदन जुड़ने के कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ती चली गई।
अब विभाग ने शुरू की कवायद
लंबे समय से लंबित आवेदनों को देखते हुए अब संबंधित विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए हैं। अधिकारियों ने अनुदान के लिए प्राप्त आवेदनों का विस्तृत ब्योरा जुटाना शुरू किया है। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कुल कितने आवेदन लंबित हैं, उनमें से कितने पात्र हैं और भुगतान के लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी।
ब्योरा तैयार होने के बाद अनुदान मद में आवश्यक राशि के आवंटन को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि आवेदकों को पैसा कब तक मिलेगा, इसे लेकर फिलहाल स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।
लंबी होती जा रही आवेदकों की सूची
इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ बिहार में भी इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है। खासकर इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। पेट्रोल-डीजल की लागत से बचत और कम परिचालन खर्च के कारण लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
सरकारी अनुदान भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन अनुदान के भुगतान में लंबी देरी होने से वाहन खरीदारों में निराशा बढ़ सकती है। कई खरीदार वाहन खरीदते समय मिलने वाले सरकारी प्रोत्साहन को कुल लागत में शामिल करके अपना बजट तैयार करते हैं।
पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिक वाहन
देशभर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ स्थानीय स्तर पर वाहन उत्सर्जन घटाने में मदद करते हैं। बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इन्हें परिवहन के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन चुनने के लिए प्रेरित करना है।
अनुदान मिलने में देरी से बढ़ी परेशानी
वाहन खरीदारों की मुख्य चिंता यह है कि आवेदन और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी उन्हें लंबे समय तक राशि का इंतजार करना पड़ रहा है। यदि किसी योजना के तहत निर्धारित आर्थिक लाभ समय पर नहीं मिलता है तो इसका असर योजना के प्रति लोगों के भरोसे पर भी पड़ सकता है।
आवेदकों को उम्मीद है कि विभाग लंबित मामलों का ब्योरा जुटाने के बाद जल्द राशि की व्यवस्था करेगा। इससे पुराने आवेदनों का निपटारा हो सकेगा और नई अर्जियों पर भी समय से कार्रवाई संभव होगी।
पात्र आवेदनों की हो सकती है जांच
विभाग की ओर से आवेदनों का ब्योरा जुटाने के दौरान पात्रता और दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अनुदान केवल उन वाहन मालिकों को मिले जो योजना के निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करते हैं।
वाहन का पंजीकरण, खरीद की तारीख, वाहन की श्रेणी और योजना से संबंधित अन्य दस्तावेज इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों की अंतिम सूची तैयार की जा सकती है।
आवंटन पर टिकी नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल अनुदान के लिए राशि के आवंटन का है। लंबित आवेदनों की संख्या और भुगतान के लिए आवश्यक कुल राशि का आकलन होने के बाद विभाग को वित्तीय व्यवस्था करनी होगी। पर्याप्त आवंटन मिलने के बाद ही पुराने मामलों का भुगतान तेजी से संभव हो सकेगा।
एक साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों के लिए विभाग की नई कवायद से उम्मीद जगी है। हालांकि वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब आवंटन जारी होगा और पात्र लाभार्थियों के खातों तक अनुदान की राशि पहुंचेगी।
फिलहाल विभाग लंबित आवेदनों का आंकड़ा जुटाने में लगा है। पूरी सूची तैयार होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिहार में कितने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार अनुदान का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें भुगतान करने के लिए सरकार को कितनी राशि की जरूरत होगी।





