बिहार

Diyaranchal : सौर्य ऊर्जा से जुड़ा दुग्ध व्यवसाय, ग्रामीण किसानों को रोजगार और लाभ

Kavita2
11 Jun 2026 1:55 PM IST
Diyaranchal : सौर्य ऊर्जा से जुड़ा दुग्ध व्यवसाय, ग्रामीण किसानों को रोजगार और लाभ
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Bihar बिहार: दियारांचल क्षेत्र में खेती के अलावा आधा साल पशुपालन ही ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन है। हालांकि दूध का उत्पादन अच्छा होता था, लेकिन विपणन और भंडारण की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। सहकारी ढांचे के तहत दूध संग्रह के लिए चिलिंग प्लांट लगाए गए थे, लेकिन दूरदराज इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया।

इस समस्या का समाधान दुग्ध उत्पादक समूह ने निकाला और चिलिंग प्लांट पर सौर्य ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए। इस कदम से बिजली की अनियमितता का असर समाप्त हुआ और दूध के संग्रह एवं भंडारण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलने लगी। अब क्षेत्र के लगभग 40 गांवों की 30 से अधिक दुग्ध उत्पादक समितियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग सात हजार लीटर दूध का उत्पादन और संग्रह किया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों की समितियां भी शामिल हैं।

सबसे अधिक दूध उत्पादन लालू डेरा महिला दुग्ध समिति द्वारा किया जा रहा है। इस समिति के माध्यम से प्रतिदिन करीब 1,800 लीटर दूध चिलिंग प्लांट में पहुंचाया जाता है। विभिन्न गांवों से एकत्रित दूध को लालू डेरा स्थित बल्क मिल्क चिलिंग (बीएमसी) प्लांट तक सुरक्षित रूप से पहुंचाया जाता है।

दुग्ध व्यवसाय से क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगभग छह करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है। इसका सीधा लाभ पशुपालक किसानों को मिल रहा है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।

सौर्य ऊर्जा के संयोजन से न केवल बिजली की समस्याओं का समाधान हुआ है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह एक सकारात्मक पहल है। इससे प्लांट का संचालन लगातार और स्थिर रूप से हो पा रहा है, जिससे दूध की गुणवत्ता में सुधार और बिक्री में वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल से दूरदराज क्षेत्रों में दुग्ध व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जा सकता है। सौर्य ऊर्जा संयंत्र से बिजली की निर्भरता कम हुई है और उत्पादन लागत में भी कमी आई है। इससे सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और किसानों का मनोबल बढ़ा है।

इस पहल ने दिखा दिया है कि तकनीकी नवाचार और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन आधारित व्यवसाय को सफल बनाया जा सकता है। दुग्ध उत्पादक समूह ने इस योजना के माध्यम से न केवल आर्थिक लाभ सुनिश्चित किया है, बल्कि ग्रामीण समुदायों में आत्मनिर्भरता और विकास की भावना को भी मजबूत किया है।

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