
Bihar: नालंदा जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के हरदेव भवन में बुधवार को ‘फीमेल जेंडरसाइड’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भ्रूण हत्या, बाल विवाह, मानव तस्करी, नवजात बच्चियों की हत्या, बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उपेक्षा और भेदभाव जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, प्रशासन और कानून व्यवस्था से जुड़े सभी तंत्रों को मिलकर काम करना होगा। कार्यशाला का संचालन समाज कल्याण विभाग और जनजागरण संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘फीमेल जेंडरसाइड’ केवल कन्या भ्रूण हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वे सभी स्थितियां शामिल हैं जहां केवल लड़की होने के कारण भेदभाव या हिंसा होती है।
कार्यक्रम में कहा गया कि बाल विवाह, मानव तस्करी और भ्रूण हत्या जैसी समस्याओं को केवल कानून से खत्म नहीं किया जा सकता, इसके लिए समाज में जागरूकता जरूरी है। परिवारों को अपनी सोच बदलनी होगी और बेटियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। कार्यशाला में बताया गया कि बिहार में जन्म के समय लिंगानुपात अब भी चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार पुत्र को प्राथमिकता देने की मानसिकता और अवैध लिंग जांच जैसी प्रवृत्तियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
वक्ताओं ने कहा कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत सरकार कार्रवाई कर रही है और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं के जरिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
कार्यक्रम में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल संरक्षण इकाई और अन्य विभागों के अधिकारियों की भूमिका पर भी जोर दिया गया। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया। अंत में सभी ने संकल्प लिया कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रहेंगे।





