
जमुई। जिले के सिमुलतला थाना क्षेत्र के नागवे गांव में गुरुवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के बीच पैक्स गोदाम के पास स्थित करीब 30 से 35 साल पुराना जर्जर सामुदायिक भवन अचानक भरभराकर गिर गया। भवन के भारी मलबे के नीचे गांव की 45 वर्षीय महिला भुनवा देवी और उनके तीन मवेशी दब गए। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
महिला के मलबे में दबने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे और बिना समय गंवाए बचाव कार्य शुरू कर दिया। मलबा भारी होने के कारण उसे हाथों से हटाना मुश्किल था। इसके बाद एक्सकेवेटर यानी जेसीबी की मदद ली गई। ग्रामीणों ने सावधानी के साथ मलबा हटाकर भुनवा देवी को बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि महिला को जीवित और सुरक्षित निकाल लिया गया।
अचानक हुए इस हादसे से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका था। लगातार हो रही बारिश के कारण इसकी कमजोर संरचना पर असर पड़ा और गुरुवार दोपहर भवन अचानक जमींदोज हो गया।
तेज आवाज के साथ गिरा सामुदायिक भवन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतनी तेजी से हुआ कि आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भवन गिरने के दौरान तेज आवाज हुई। इसके बाद आसपास धूल और मलबा फैल गया। ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े तो पता चला कि भुनवा देवी मलबे में दब गई हैं।
महिला के साथ उनके तीन मवेशी भी मलबे की चपेट में आ गए। इसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल महिला को सुरक्षित निकालने की कोशिश शुरू कर दी। शुरुआती तौर पर लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाने का प्रयास किया, लेकिन भवन का बड़ा हिस्सा गिर जाने के कारण बचाव कार्य आसान नहीं था।
मौके पर मौजूद लोगों ने इसके बाद जेसीबी की व्यवस्था की। मशीन की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया गया, ताकि अंदर दबी महिला को किसी तरह का अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
ग्रामीणों की तत्परता से बची महिला की जान
हादसे के बाद ग्रामीणों की तत्परता ने बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई। महिला के मलबे में दबे होने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण एकजुट हो गए। किसी ने जेसीबी की व्यवस्था की तो अन्य लोगों ने मलबा हटाने और महिला तक पहुंचने का रास्ता बनाने में मदद की।
भारी मलबे के बीच महिला की स्थिति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही थी। ग्रामीणों ने सावधानीपूर्वक बचाव अभियान जारी रखा और आखिरकार भुनवा देवी को मलबे से बाहर निकाल लिया गया।
महिला के जीवित बाहर आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। जिस तरह पूरा भवन धराशायी हुआ था, उसे देखते हुए शुरुआत में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी।
तीन मवेशी भी मलबे में दबे
हादसे में भुनवा देवी के साथ उनके तीन मवेशी भी मलबे के नीचे दब गए। भवन गिरने के बाद मलबा बड़े क्षेत्र में फैल गया था। ग्रामीणों ने महिला को निकालने के साथ मवेशियों को बचाने के लिए भी प्रयास किए।
मवेशियों की स्थिति को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का ध्यान सबसे पहले महिला को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों की आजीविका पशुपालन से जुड़ी होती है। ऐसे में मवेशियों को होने वाला नुकसान भी परिवार के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है।
दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश
नागवे गांव और आसपास के इलाके में पिछले दो दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश होने की जानकारी है। बारिश के कारण पुराने और कमजोर भवनों के लिए खतरा बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि जिस सामुदायिक भवन में हादसा हुआ, वह करीब 30 से 35 साल पुराना था और उसकी स्थिति पहले से जर्जर थी। लगातार बारिश से दीवारों और भवन की संरचना में नमी बढ़ने के बाद उसके अचानक गिरने की बात कही जा रही है। हालांकि भवन गिरने के वास्तविक कारण की पुष्टि प्रशासनिक या तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
लगातार बारिश के दौरान मिट्टी के मकान, जर्जर भवन और कमजोर दीवारों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे भवनों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
हादसे से गांव में मची अफरा-तफरी
सामुदायिक भवन गिरने की आवाज सुनते ही आसपास के घरों से लोग बाहर निकल आए। जब लोगों को पता चला कि एक महिला मलबे के नीचे फंसी हुई है तो मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए।
महिला के परिजनों और ग्रामीणों में चिंता का माहौल था। बचाव कार्य के दौरान हर किसी की नजर मलबे पर टिकी रही। जेसीबी से मलबा हटाते समय भी विशेष सावधानी बरती गई, ताकि अंदर फंसी महिला को चोट न पहुंचे।
काफी प्रयास के बाद जब भुनवा देवी को सुरक्षित बाहर निकाला गया तो मौके पर मौजूद लोगों ने राहत महसूस की।
जर्जर भवनों को लेकर बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद गांव और आसपास मौजूद पुराने तथा जर्जर सरकारी और सामुदायिक भवनों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश के मौसम में कमजोर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे भवनों की समय रहते पहचान और जांच की जानी चाहिए। यदि कोई इमारत रहने या उपयोग करने के लिए सुरक्षित नहीं है तो उसके आसपास लोगों की आवाजाही रोकने जैसे एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए।
विशेष रूप से बरसात के दौरान पुरानी इमारतों की दीवारों में नमी आने, छत कमजोर होने और नींव प्रभावित होने की आशंका रहती है।
बड़ा हादसा टला
नागवे गांव की इस घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि भारी मलबे में दबने के बावजूद भुनवा देवी को ग्रामीणों ने जीवित बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों की त्वरित प्रतिक्रिया और जेसीबी की समय पर व्यवस्था के कारण बचाव अभियान तेजी से चलाया जा सका।
करीब तीन दशक पुराने सामुदायिक भवन के अचानक जमींदोज होने से बड़ी जनहानि की आशंका पैदा हो गई थी। हादसे के समय यदि भवन के आसपास अधिक लोग मौजूद होते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में जर्जर भवनों से दूरी बनाए रखने की जरूरत को सामने रखा है। साथ ही संकट के समय ग्रामीणों की एकजुटता और तत्काल बचाव प्रयास ने एक महिला की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





