
बेतिया। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। अब जिले के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रतिदिन गूगल फॉर्म के माध्यम से अपने शिक्षण कार्य का विवरण देना होगा। इसके साथ ही कक्षा की तस्वीर भी अपलोड करना अनिवार्य होगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राजन कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, 1 अगस्त से जिले के सभी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों, सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) और पीएम श्री विद्यालयों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षक हर दिन पढ़ाए गए विषय, संचालित कक्षाओं और कक्षा से जुड़ी तस्वीरों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराएंगे।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि गूगल फॉर्म में दर्ज की गई जानकारी ही शिक्षक की उपस्थिति और उस दिन किए गए शिक्षण कार्य का आधिकारिक प्रमाण मानी जाएगी। यानी अब केवल विद्यालय पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षक को अपने पढ़ाने की प्रक्रिया का ऑनलाइन रिकॉर्ड भी देना होगा।
डीईओ की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई शिक्षक विद्यालय बंद होने तक गूगल फॉर्म में अपनी जानकारी दर्ज नहीं करता है तो उसे उस दिन अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और संबंधित दिन का वेतन भी काटा जा सकता है। विभागीय कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।
नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से शिक्षा विभाग शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और विद्यालयों में होने वाले पठन-पाठन की वास्तविक स्थिति की निगरानी करना चाहता है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार विद्यालयों में पढ़ाई को लेकर शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में ऑनलाइन निगरानी प्रणाली से शिक्षण कार्य में पारदर्शिता आएगी और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
गूगल फॉर्म की निगरानी के लिए तीन स्तरों पर व्यवस्था बनाई गई है। संकुल स्तर पर संकुल व्यवस्थापक इसकी निगरानी करेंगे। वहीं प्रखंड स्तर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) और उनके अधिकृत कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) की अध्यक्षता में गठित शैक्षणिक कोषांग पूरे अभियान की समीक्षा करेगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शैक्षणिक कोषांग को निर्देश दिया है कि गूगल फॉर्म में दर्ज होने वाली जानकारी की नियमित समीक्षा की जाए। प्रत्येक सोमवार को उन शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी अपलोड नहीं की है। इसके बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों में इस व्यवस्था का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। विभाग का कहना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग से शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी और स्कूलों में नियमित पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा।
डीईओ राजन कुमार ने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मासिक शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराना विभाग की प्राथमिकता है। नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करें और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से विद्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। गूगल फॉर्म आधारित निगरानी व्यवस्था से अधिकारियों को स्कूलों की स्थिति की जानकारी समय पर मिल सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकेंगे।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था लागू होने के साथ शिक्षकों के सामने तकनीकी चुनौतियां भी आ सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या या तकनीकी जानकारी की कमी जैसी परेशानियों को लेकर भी चर्चा हो रही है। लेकिन विभाग का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और विद्यार्थियों के हित में बेहतर माहौल तैयार करना है।
पश्चिम चंपारण में शुरू की गई यह पहल बिहार के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।





