
x
पटना: बिहार में अदालती मामलों की सुनवाई के दौरान सरकारी गवाहों की अनुपस्थिति और बार-बार तारीख बढ़ने की समस्या को लेकर सख्ती का मुद्दा सामने आया है। न्यायिक प्रक्रिया में सरकारी गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर आपराधिक मामलों में पुलिसकर्मियों, जांच अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के गवाही देने नहीं पहुंचने से सुनवाई प्रभावित होती है।
सरकारी गवाहों की गैरहाजिरी का मामला हाल ही में मुजफ्फरपुर की एक अदालत में भी सामने आया था। सितंबर 2026 में अदालत ने वर्ष 2018 के एक आपराधिक मामले में गवाही देने नहीं पहुंचने पर नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। संबंधित पुलिसकर्मियों को पहले समन और जमानती वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। अदालत में आपराधिक मुकदमों की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी मामले में पुलिस की जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी गवाही की प्रक्रिया लंबी चल सकती है। जब कोई महत्वपूर्ण गवाह निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं होता, तो सुनवाई आगे बढ़ाने में परेशानी आती है।
सरकारी गवाहों में जांच अधिकारी, प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। इनकी गवाही घटनाक्रम, जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और कार्रवाई की प्रक्रिया को अदालत के सामने स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होती है।
मुजफ्फरपुर के मामले में अदालत ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई में संबंधित गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की गई थी। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, अदालत किसी गवाह की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए समन जारी कर सकती है। निर्धारित आदेशों का पालन नहीं होने पर परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, किसी गवाह पर कार्रवाई उसकी अनुपस्थिति के कारणों और न्यायालय के आदेशों पर निर्भर करती है।
मुकदमों में बार-बार सुनवाई टलने का असर केवल अदालत की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहता। पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में देरी हो सकती है, जबकि आरोपियों को भी लंबे समय तक मुकदमे की प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। इससे न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सरकारी कर्मचारियों को गवाही की तारीख की जानकारी समय पर मिलना और संबंधित विभागों द्वारा उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना सुनवाई में होने वाली अनावश्यक देरी को कम कर सकता है।
पटना हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अदालती प्रक्रियाओं और आपराधिक न्यायालय नियमों से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, दो नोटिस के बाद सभी सरकारी गवाहों पर स्वतः कार्रवाई लागू करने वाले किसी नए राज्यव्यापी आदेश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे लागू नियम के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। सरकारी गवाहों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को कम करना है। अदालतों के आदेशों का समय पर पालन होने से लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Next Story





