
पश्चिम चंपारण : सप्तक्रांति एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रहा एक दिव्यांग यात्री भीड़ के कारण बोगी में प्रवेश नहीं कर सका। ट्रेन में सवार नहीं हो पाने से नाराज यात्री अचानक रेलवे ट्रैक पर उतर गया और इंजन के ठीक आगे जाकर खड़ा हो गया। ट्रैक पर व्यक्ति को देखते ही लोको पायलट ने सतर्कता दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। ट्रेन समय रहते रुकने से बड़ा हादसा टल गया और यात्री की जान बच गई। इस घटना के कारण स्टेशन पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के अनुसार, सप्तक्रांति एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। बोगियों के दरवाजों पर यात्रियों की भीड़ जमा होने के कारण धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। इसी दौरान एक दिव्यांग यात्री ने भी ट्रेन में सवार होने की कोशिश की, लेकिन शारीरिक परेशानी और अत्यधिक भीड़ के चलते वह बोगी तक नहीं पहुंच पाया। कई प्रयासों के बावजूद ट्रेन में जगह नहीं मिलने से वह परेशान हो गया।
ट्रेन में नहीं चढ़ पाने के बाद यात्री ने नाराजगी जताई। देखते ही देखते वह प्लेटफॉर्म से नीचे उतरकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। इसके बाद उसने ट्रेन के इंजन के सामने खड़े होकर रास्ता रोक दिया। यात्री के इस कदम को देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के होश उड़ गए। कई यात्रियों ने उसे ट्रैक से हटने के लिए आवाज लगाई, लेकिन तब तक ट्रेन के रवाना होने की स्थिति बन चुकी थी।
लोको पायलट की नजर जैसे ही इंजन के सामने खड़े व्यक्ति पर पड़ी, उसने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। अचानक ब्रेक लगाए जाने से ट्रेन रुक गई। चालक की सूझबूझ और समय पर लिए गए निर्णय के कारण दिव्यांग यात्री ट्रेन की चपेट में आने से बच गया। यदि ट्रेन रोकने में कुछ पल की भी देरी होती तो गंभीर हादसा हो सकता था।
घटना के दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में घबराहट का माहौल बन गया। कुछ देर तक लोग यह समझ नहीं पाए कि यात्री अचानक ट्रैक पर क्यों उतर गया। बाद में पता चला कि भीड़ के कारण ट्रेन में नहीं चढ़ पाने से वह आहत और नाराज था। ट्रेन रुकने के बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटनाक्रम के कारण रेल परिचालन भी कुछ समय के लिए प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
यह घटना रेलवे स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। रेलवे की ओर से दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और सहायता जैसी सुविधाओं का प्रावधान रहता है। इसके बावजूद भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर जरूरतमंद यात्रियों को बोगियों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। त्योहारों और व्यस्त दिनों में ट्रेनों में भीड़ बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
दिव्यांग यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान सामान्य यात्रियों की तुलना में अधिक समय तथा सहायता की आवश्यकता होती है। बोगियों के दरवाजों पर भीड़ जमा होने से उनके गिरने या चोटिल होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे दिव्यांग, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को पहले सुरक्षित तरीके से सवार होने का अवसर दें।
इस घटना ने यात्रियों के असंतोष को सुरक्षित तरीके से संभालने की आवश्यकता भी सामने रखी है। ट्रेन में नहीं चढ़ पाना निश्चित रूप से परेशान करने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन रेलवे ट्रैक पर जाना अत्यंत खतरनाक है। रेलवे परिसर में किसी भी कारण से पटरियों पर उतरना न केवल संबंधित व्यक्ति बल्कि ट्रेन में बैठे सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। अचानक ब्रेक लगाने से ट्रेन के अंदर मौजूद यात्री गिरकर घायल हो सकते हैं।
रेलवे सुरक्षा से जुड़े जानकार लगातार लोगों से अपील करते हैं कि किसी समस्या की स्थिति में ट्रैक पर उतरने या ट्रेन का रास्ता रोकने के बजाय स्टेशन मास्टर, रेल सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस या अन्य रेल कर्मचारियों से संपर्क किया जाना चाहिए। रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से भी सहायता मांगी जा सकती है। दिव्यांग यात्रियों को जरूरत होने पर यात्रा से पहले सहायता सेवा की जानकारी लेना भी उपयोगी हो सकता है।
सप्तक्रांति एक्सप्रेस से जुड़ी इस घटना में लोको पायलट की सतर्कता निर्णायक साबित हुई। इंजन के सामने अचानक यात्री को देखकर उसने बिना देरी किए इमरजेंसी ब्रेक लगाया और संभावित दुर्घटना रोक दी। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने भी चालक की सूझबूझ की सराहना की। यदि चालक समय रहते प्रतिक्रिया नहीं देता तो घटना भयावह रूप ले सकती थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरफ दिव्यांग यात्री की परेशानी को सामने रखा है तो दूसरी तरफ यात्रियों को सुरक्षा नियमों का पालन करने का संदेश भी दिया है। रेलवे प्रशासन के लिए जरूरी है कि अत्यधिक भीड़ वाली ट्रेनों के आगमन के समय प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाएं। दिव्यांग यात्रियों को बोगी तक पहुंचाने के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। लोको पायलट की तत्परता से यात्री सुरक्षित बच गया और बड़ा रेल हादसा टल गया। हालांकि, यात्री के इस कदम ने कुछ देर के लिए स्टेशन पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। यह मामला सभी यात्रियों के लिए चेतावनी भी है कि परेशानी या नाराजगी में उठाया गया एक असुरक्षित कदम जीवन को खतरे में डाल सकता है।





