
पटना। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान के बाद विवादों में घिर गए हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए की गई उनकी टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना करते हुए भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी और लोगों की भावनाएं आहत होने पर माफी भी मांगी है।
जानकारी के अनुसार, यह विवाद 29 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा से शुरू हुआ। कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के स्वरूप तथा उनकी लीलाओं की तुलना की थी। उन्होंने भगवान राम को सीधा बताते हुए श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का उल्लेख किया। इसके साथ ही भगवान कृष्ण की बांसुरी और भगवान राम के धनुष को लेकर भी टिप्पणी की।
धीरेंद्र शास्त्री ने कथा के दौरान भगवान कृष्ण के बांसुरी बजाने और भगवान राम के धनुष चलाने की तुलना की। उन्होंने भगवान कृष्ण की मुद्रा और वृंदावन का भी उल्लेख किया। इस दौरान कही गई उनकी कुछ बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। वीडियो सामने आने के बाद कृष्ण भक्तों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने उनकी भाषा पर आपत्ति जताई।
विरोध करने वालों का कहना था कि भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों ही हिंदू धर्म में आराध्य हैं। ऐसे में किसी एक भगवान को श्रेष्ठ दिखाने के लिए दूसरे के स्वरूप या लीलाओं की तुलना करना उचित नहीं है। ब्रज क्षेत्र के संतों और यादव समाज के कुछ लोगों ने भी इस टिप्पणी को लेकर नाराजगी जताई।
इस विवाद में अब बिहार की राजनीति भी शामिल हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से धीरेंद्र शास्त्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने टिप्पणी को अशोभनीय और अमर्यादित बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उनके बारे में इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अहंकार को चुनौती दी थी। उन्होंने भगवान कृष्ण को लोकनायक बताते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं।
आरजेडी नेता ने कहा कि भगवान राम और श्रीकृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में नफरत फैलाने वाले लोग पहले इंसानों को बांटने का काम करते थे और अब भगवान के नाम पर भी विभाजन की कोशिश कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर भाजपा नेताओं को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े ऐसे बयानों पर उनकी क्या भूमिका है। उन्होंने संबंधित लोगों से देश, समाज और सनातन धर्म के अनुयायियों से माफी मांगने की मांग की। हालांकि, भाजपा नेताओं को लेकर लगाए गए आरोप तेजस्वी यादव की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।
तेजस्वी यादव के अलावा उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने भी धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना की है। रोहिणी ने उनके धार्मिक आचरण और बयानबाजी पर सवाल उठाए। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं की प्रतिक्रियाओं से विवाद का राजनीतिक दायरा और बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर आपत्ति जताई है। अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित इस प्रकार की टिप्पणी समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है। उन्होंने मामले का उच्च स्तर पर संज्ञान लेकर कार्रवाई किए जाने की मांग की।
अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान राम और श्रीकृष्ण के नाम पर मतभेद पैदा करने वाली टिप्पणियां समाज की एकता के लिए उचित नहीं हैं। उनके अनुसार, धार्मिक मंचों से बोलते समय श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।
इधर, विवाद बढ़ने के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दो नवंबर को एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी बात को गलत संदर्भ में समझा गया और कुछ लोगों ने पूरा वीडियो देखने के बजाय उसके एक हिस्से के आधार पर प्रतिक्रिया दी।
धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, उन्होंने कथा के दौरान भगवान राम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन भावपूर्ण शैली में किया था। उनका उद्देश्य किसी भी भगवान का अपमान करना या उनके भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ब्रज के भक्त हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच भेद करना उनकी भावना नहीं थी। कथा में कही गई बात को उन्होंने पारंपरिक भक्ति साहित्य में मिलने वाले उलाहने और संवाद की शैली से जोड़कर समझाया।
धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी श्रद्धालु की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं। उन्होंने लोगों से पूरे संदर्भ को समझने की अपील की।
हालांकि, माफी और स्पष्टीकरण के बाद भी सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर चर्चा जारी है। कुछ लोग धीरेंद्र शास्त्री की सफाई को पर्याप्त मान रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धार्मिक कथाओं, सार्वजनिक बयानबाजी और राजनीति के आपसी संबंधों को चर्चा में ला दिया है। एक ओर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयान को भक्ति भाव में कही गई बात बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेता इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं।
फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बावजूद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्पष्टीकरण के बाद विवाद शांत होता है या आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती है।





