
पटना। बिहार पुलिस के शीर्ष नेतृत्व में अस्थायी बदलाव किया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार के 21 दिनों के अवकाश पर जाने के बाद राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। गृह विभाग की अधिसूचना के मुताबिक प्रीता वर्मा 16 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगी।
प्रीता वर्मा 1991 बैच की बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में महानिदेशक, होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं के पद पर तैनात हैं। डीजीपी विनय कुमार की अनुपस्थिति में वह अपने मौजूदा दायित्वों के साथ बिहार के डीजीपी का कामकाज भी देखेंगी। इस दौरान राज्य पुलिस मुख्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी मामलों की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि विनय कुमार 21 दिनों के अर्जित अवकाश पर हैं। उनकी छुट्टी की अवधि के लिए ही प्रीता वर्मा को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में इसे स्थायी नियुक्ति के बजाय कार्यवाहक व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। विनय कुमार के अवकाश से लौटने के बाद वह फिर से डीजीपी का दायित्व संभालेंगे।
प्रीता वर्मा बिहार पुलिस के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। 1991 बैच की अधिकारी होने के कारण उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। अपने लंबे सेवाकाल में वह विभिन्न महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों पर काम कर चुकी हैं। वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने डीजीपी की अनुपस्थिति में उन्हें राज्य पुलिस का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
इसी वर्ष जुलाई में बिहार सरकार ने बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया था। उस दौरान प्रीता वर्मा को महानिदेशक, होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं बनाया गया था। इससे पहले भी वह पुलिस प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं। अब डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार मिलने से राज्य पुलिस के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी भी कुछ समय के लिए उनके हाथ में आ गई है।
डीजीपी राज्य पुलिस बल का सर्वोच्च पद होता है। इस पद पर तैनात अधिकारी के पास पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन, जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय और पुलिस मुख्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की जिम्मेदारी होती है। डीजीपी के अवकाश जैसी स्थिति में सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देती है, ताकि पुलिस प्रशासन का कामकाज निर्बाध रूप से चलता रहे।
प्रीता वर्मा के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अपने मौजूदा विभागों के साथ डीजीपी कार्यालय का कामकाज भी देखना होगा। होमगार्ड और अग्निशमन सेवाओं से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के अलावा अब राज्यभर की पुलिस व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी उनकी निगरानी रहेगी।
वहीं विनय कुमार बिहार कैडर के 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें दिसंबर 2024 में बिहार का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक-सह-अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे। राज्य सरकार ने उन्हें डीजीपी आलोक राज की जगह यह जिम्मेदारी दी थी।
विनय कुमार के छुट्टी पर जाने को लेकर सोशल मीडिया या राजनीतिक चर्चाओं में अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इसे 21 दिनों का अर्जित अवकाश बताया गया है। इसलिए अवकाश के कारणों को लेकर बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी अन्य निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
बिहार पुलिस के लिए अगले 21 दिनों तक प्रीता वर्मा शीर्ष स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनके निर्देश और निगरानी रहेगी। राज्य में त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और अपराध नियंत्रण जैसे विषय भी पुलिस नेतृत्व की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।
सरकार द्वारा की गई यह व्यवस्था फिलहाल 6 अक्टूबर तक के लिए है। इसके बाद विनय कुमार के वापस लौटने पर डीजीपी का नियमित प्रभार उनके पास रहेगा। इस तरह बिहार पुलिस के शीर्ष पद पर यह बदलाव स्थायी नहीं बल्कि डीजीपी की छुट्टी की अवधि के लिए की गई अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है।





