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जेल में रहकर भी नवरात्र व्रत रखेंगे बंदी, फलाहार की व्यवस्था
भागलपुर : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भागलपुर की जेलों में भी मां दुर्गा की भक्ति का माहौल रहेगा। जेलों में बंद 100 से अधिक बंदी नवरात्र का व्रत रखेंगे। इसके लिए फलाहार की विशेष व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। जेल की सलाखों के पीछे रहने के बावजूद बंदी अपनी धार्मिक आस्था और परंपराओं के अनुसार मां दुर्गा की आराधना करेंगे।
नवरात्र हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। कई भक्त उपवास रखकर माता की आराधना करते हैं और सुख-शांति तथा परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। इसी आस्था के तहत भागलपुर की जेलों में बंद कई बंदियों ने भी व्रत रखने का फैसला किया है।
100 से अधिक बंदी रखेंगे व्रत
जानकारी के अनुसार, भागलपुर की जेलों में 100 से अधिक बंदी शारदीय नवरात्र के दौरान उपवास करेंगे। बंदियों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए व्रत के दौरान फलाहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे व्रत रखने वाले बंदियों को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने में सुविधा मिलेगी। नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्य भोजन से परहेज करते हैं और फल, दूध तथा व्रत में खाए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। हालांकि, उपवास रखने के नियम व्यक्ति और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
जेल में फलाहार का विशेष इंतजाम
व्रत रखने वाले बंदियों के लिए फलाहार की व्यवस्था इस खबर का प्रमुख पहलू है। उपवास के दौरान भोजन की जगह फलाहार लेने वाले बंदियों को उनकी जरूरत के अनुसार व्यवस्था उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। जेल में बंद लोगों के लिए धार्मिक पर्व अपनी आस्था से जुड़ने का अवसर होते हैं। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और पूजा-पाठ के जरिए बंदी अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पर्व मनाएंगे।
आस्था और परंपरा से जुड़ा नवरात्र पर्व
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पहले दिन घटस्थापना करते हैं और पूरे नौ दिनों तक पूजा-अर्चना, भजन तथा व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। कुछ भक्त पहले और आखिरी दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ पूरे नौ दिनों तक व्रत करते हैं। भागलपुर की जेलों में भी नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले बंदी अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा और उपवास की परंपरा निभाएंगे। जेलों में फलाहार की व्यवस्था होने से उन्हें इस धार्मिक पर्व में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
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