बिहार

जर्मनी-रूस से गया जी पहुंचे श्रद्धालु, फल्गु तट पर किया पूर्वजों का तर्पण

nidhi
4 Oct 2026 10:00 AM IST
जर्मनी-रूस से गया जी पहुंचे श्रद्धालु, फल्गु तट पर किया पूर्वजों का तर्पण
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गयाजी : बिहार के गया जी में पितरों के मोक्ष की कामना लेकर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जर्मनी और रूस समेत विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर हिंदू परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण किया। मंत्रोच्चार के बीच विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

गया जी को सनातन परंपरा में पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस बार विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी। फल्गु नदी के तट पर विदेशी श्रद्धालुओं ने स्थानीय पुरोहितों के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए। पूजा के दौरान पिंड अर्पित किए गए और पूर्वजों के नाम से तर्पण किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ मंत्रोच्चार और पूजा की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
विदेश से आए श्रद्धालुओं के लिए भारतीय धार्मिक परंपराओं को करीब से समझने का यह विशेष अवसर रहा। उन्होंने पिंडदान की प्रक्रिया के साथ उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बारे में भी जानकारी ली। फल्गु नदी के तट पर पूजा के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी आस्था दिखाई दी। गया जी में पिंडदान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पितृ पक्ष के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करने पहुंचते हैं। विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी सहित कई धार्मिक स्थान पिंडदान की परंपरा से जुड़े हुए हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध और तर्पण के जरिए पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। परिवार के सदस्य अपने पितरों को याद करते हुए जल, तिल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। पिंडदान के दौरान भी पूर्वजों के नाम से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस बार गया जी के धार्मिक माहौल को और खास बना दिया। अलग-अलग भाषा और संस्कृति से आने के बावजूद श्रद्धालुओं ने भारतीय विधि-विधान के अनुसार पूजा की। स्थानीय पुरोहितों ने उन्हें प्रत्येक धार्मिक प्रक्रिया का महत्व समझाते हुए अनुष्ठान संपन्न कराया।
फल्गु नदी तट पर हुए इस पिंडदान ने गया जी की धार्मिक परंपरा के वैश्विक आकर्षण को भी सामने रखा। भारतीय संस्कृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान की परंपरा से प्रभावित होकर विदेशों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं। पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ जर्मनी, रूस और अन्य देशों से आए श्रद्धालुओं ने पिंडदान पूरा किया। सात समंदर पार से गया जी पहुंचे इन श्रद्धालुओं की आस्था ने एक बार फिर दिखाया कि इस प्राचीन धार्मिक नगरी की पहचान अब केवल देश तक सीमित नहीं है।
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