बिहार

दरभंगा DMCH की पुरानी OPD में भरा पानी, मरीज बेहाल

Saba Naaz
29 Jun 2026 6:36 PM IST
दरभंगा DMCH की पुरानी OPD में भरा पानी, मरीज बेहाल
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दरभंगा: उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्रों में से एक, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश के कारण अस्पताल की पुरानी ओपीडी (Outpatient Department) पूरी तरह जलमग्न हो गई। ओपीडी भवन के गलियारों, कमरों और मुख्य परिसर में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे अस्पताल परिसर किसी तालाब जैसा नजर आने लगा। इस जलजमाव के कारण इलाज कराने आए हजारों मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, सिस्टम की इस नाकामी और आफत के बावजूद मरीजों की मजबूरी इस कदर हावी रही कि पानी के बीच ही हजारों लोगों ने डॉक्टरों से परामर्श लिया।

जलजमाव से बेहाल हुए मरीज, व्यवस्था पर उठे सवाल

लगातार हुई बारिश का सबसे बुरा असर पुरानी ओपीडी के बुनियादी ढांचे पर देखने को मिला। जलजमाव के कारण ओपीडी के काउंटरों और डॉक्टरों के कमरों तक पहुंचने वाले रास्ते पानी में डूब गए। सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों, नवजात बच्चों और गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों को उठानी पड़ी। कई तीमारदार अपने लाचार मरीजों को गोद में उठाकर या स्ट्रेचर को पानी के बीच से खींचते हुए डॉक्टरों के पास ले जाते दिखे। इसके अलावा, लगातार हो रही तेज बारिश और जलजमाव के चलते कुछ विभागों के डॉक्टर भी अपने निर्धारित समय से देरी से ओपीडी पहुंचे। इस वजह से दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों को जलजमाव वाले गलियारों में घंटों खड़े रहकर डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। अस्पताल परिसर में जलनिकासी (Water Drainage) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई, जिसने अस्पताल प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी।

भारी आफत के बीच भी उमड़ी मरीजों की भीड़: रिकॉर्ड 3100 रजिस्ट्रेशन

तमाम अव्यवस्थाओं और घुटने भर पानी के बावजूद डीएमसीएच में मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं देखी गई। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विभिन्न विभागों की ओपीडी में कुल मिलाकर करीब 3,100 मरीजों ने अपना इलाज कराया। इनमें से मुख्य ओपीडी (Main OPD) में ही 2,500 से अधिक नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया। ओपीडी के साथ-साथ अस्पताल के अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भी मरीजों की भारी भीड़ रही। शाम पांच बजे तक इमरजेंसी वॉर्ड में लगभग 200 मरीजों का इलाज किया गया। वहीं, हाल ही में शुरू हुए सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भी 100 से अधिक मरीजों ने सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों से परामर्श लिया। इसके अलावा, गायनी (स्त्री रोग) विभाग में भी 100 से अधिक महिलाएं इलाज के लिए पहुंचीं, जिन्हें जलजमाव के कारण प्रसव कक्ष और वार्डों तक आने-जाने में भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

स्थायी समाधान की मांग

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बारिश रुकने के कुछ घंटों बाद परिसर से पानी निकाल दिया गया था और जलजमाव के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं होने दी गईं। लेकिन स्थानीय लोगों, मरीजों और उनके परिजनों में इस व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश है। मरीजों का कहना है कि डीएमसीएच में हर साल बारिश के मौसम में यही नजारा देखने को मिलता है। लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पुरानी ओपीडी परिसर में जलनिकासी की एक मजबूत और स्थायी व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में इलाज के लिए आने वाले लाचार लोगों को इस तरह के नारकीय हालातों से न गुजरना पड़े।

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