
Bihar बिहार: गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक मजबूरियों के कारण जब कई बच्चों का बचपन बालश्रम की भेंट चढ़ जाता है, तब कुछ लोग उनके जीवन में उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आते हैं। दरभंगा जिले के इटवा शिवनगर निवासी समाजसेवी अजीत कुमार मिश्र ऐसे ही व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिन्होंने सैकड़ों बच्चों के जीवन को नई दिशा देने का काम किया है।
अजीत कुमार मिश्र पिछले कई वर्षों से बाल अधिकारों की रक्षा और बालश्रम उन्मूलन के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। अपने प्रयासों के माध्यम से उन्होंने अब तक करीब 150 बाल श्रमिकों को विभिन्न कार्यस्थलों से मुक्त कराया और उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जानकारी के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चों को केवल काम से बाहर निकालना ही उनका उद्देश्य नहीं रहा, बल्कि उन्हें शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना भी उनकी प्राथमिकता रही है। इसी दिशा में उन्होंने सर्वशिक्षा अभियान और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के सहयोग से 500 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है।
अजीत कुमार मिश्र ने बताया कि बालश्रम की समस्या केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से भी समाप्त की जा सकती है। इसके लिए उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया और बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया। उनके प्रयासों से कई ऐसे परिवारों ने भी अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने का निर्णय लिया, जो पहले आर्थिक कारणों से उन्हें काम पर भेजते थे।
स्थानीय स्तर पर उनके कार्यों की सराहना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अजीत कुमार मिश्र के प्रयासों से कई बच्चों का जीवन बदल गया है, जो पहले छोटे-मोटे कामों में लगे रहते थे, अब स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनका कहना है कि यदि ऐसे प्रयासों को सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले, तो बालश्रम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अजीत कुमार मिश्र ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य केवल कुछ बच्चों को बचाना नहीं, बल्कि पूरे समाज को बालश्रम के खिलाफ जागरूक करना है, ताकि कोई भी बच्चा अपने बचपन से वंचित न रह जाए।





