बिहार

AI का खतरनाक इस्तेमाल, दुल्हन का फर्जी अश्लील वीडियो वायरल, शादी टूटी

Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 5:39 PM IST
AI का खतरनाक इस्तेमाल, दुल्हन का फर्जी अश्लील वीडियो वायरल, शादी टूटी
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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के बेला थाना क्षेत्र में एक युवती की तस्वीरों से कथित तौर पर फर्जी अश्लील फोटो और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए गए। आरोपियों ने आपत्तिजनक सामग्री युवती के होने वाले ससुराल पक्ष को भी भेज दी, जिसके बाद उसकी तय शादी टूट गई। इस घटना से पीड़ित युवती और उसका परिवार गहरे सदमे में है। युवती के पिता की शिकायत पर पुलिस ने चार सगे भाई-बहनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजी जिंदगी को नुकसान पहुंचाने के लिए किस तरह किया जा सकता है। पुलिस अब संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
शादी से पहले युवती को बदनाम करने की साजिश
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता की शादी तय हो चुकी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था। इसी बीच सोशल मीडिया पर युवती की कथित आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो सामने आने लगे।आरोप है कि युवती की सामान्य तस्वीरों में एआई और डिजिटल तकनीक की मदद से छेड़छाड़ की गई। इसके बाद ऐसी सामग्री तैयार की गई, जिससे युवती की छवि खराब हो सके।इतना ही नहीं, आरोपियों ने कथित फर्जी वीडियो उसके रिश्तेदारों और होने वाले ससुराल पक्ष के लोगों को भी भेज दिए।इन तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद ससुराल पक्ष ने शादी करने से इनकार कर दिया।शादी टूटने से परिवार को गहरा मानसिक और सामाजिक आघात पहुंचा है।
चार सगे भाई-बहनों के खिलाफ मामला दर्ज
पीड़िता के पिता ने इस संबंध में बेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।शिकायत के आधार पर पुलिस ने साहेबगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले चार सगे भाई-बहनों को नामजद आरोपी बनाया है।इन सभी पर युवती की तस्वीरों का दुरुपयोग करने, फर्जी सामग्री तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप हैं।पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। मामले में किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
वर्ष 2023 की तस्वीरों का किया गया इस्तेमाल
पुलिस शिकायत में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पीड़िता के पिता के अनुसार, वर्ष 2023 में जब युवती स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही थी, तब आरोपियों ने उसकी कुछ तस्वीरें और वीडियो हासिल किए थे।आरोप है कि बाद में इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल युवती को बदनाम करने के लिए किया गया।तस्वीरों में कथित तौर पर एआई आधारित तकनीक से बदलाव करके आपत्तिजनक वीडियो तैयार किए गए।इसके अलावा युवती के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल भी बनाए गए।इन प्रोफाइल के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश और फर्जी बातचीत के स्क्रीनशॉट प्रसारित किए जाने का आरोप है।
फर्जी चैट भी सोशल मीडिया पर की वायरल
पुलिस शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने केवल तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं की, बल्कि कथित तौर पर फर्जी चैट भी तैयार की।इन चैट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों तक पहुंचाए गए।आरोप है कि इस सामग्री को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो वह वास्तव में पीड़िता से संबंधित हो।परिजनों का कहना है कि इसका उद्देश्य युवती की सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करना और उसकी शादी में बाधा डालना था।हालांकि, डिजिटल सामग्री की वास्तविकता और उसे तैयार करने वाले व्यक्तियों की पहचान फोरेंसिक जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
ससुराल पक्ष ने शादी से किया इनकार
इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू युवती की शादी टूटना है।परिवार के अनुसार, शादी तय होने के बाद घर में तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान होने वाले ससुराल पक्ष को कथित आपत्तिजनक सामग्री भेजी गई।बताया जा रहा है कि तस्वीरें और वीडियो मिलने के बाद ससुराल पक्ष ने रिश्ता आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।इस घटना से युवती के परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है।परिजनों ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और युवती को न्याय दिलाने की मांग की है।
साइबर सेल कर रही डिजिटल साक्ष्यों की जांच
बेला थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की सहायता ली है।पुलिस संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल नंबरों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।इसके अलावा आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने वालों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि युवती की मूल तस्वीरें आरोपियों तक कैसे पहुंचीं और डिजिटल सामग्री तैयार करने में किन माध्यमों का इस्तेमाल हुआ।पुलिस के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या होता है एआई डीपफेक?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो या आवाज में वास्तविक जैसी दिखने वाली छेड़छाड़ की जा सकती है।इस तकनीक से तैयार की गई भ्रामक सामग्री को आमतौर पर डीपफेक कहा जाता है।डीपफेक तकनीक के माध्यम से किसी व्यक्ति का चेहरा दूसरी तस्वीर या वीडियो में जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा ऐसे दृश्य भी बनाए जा सकते हैं, जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं।इस तकनीक के कई वैध उपयोग हैं, लेकिन बिना सहमति किसी व्यक्ति की आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना और प्रसारित करना गंभीर कानूनी मामला बन सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली किसी भी संदिग्ध तस्वीर या वीडियो को बिना सत्यापन के वास्तविक नहीं मानना चाहिए।
महिलाओं की निजता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस घटना ने महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और निजता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।आज सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग अपनी तस्वीरें साझा करते हैं। लेकिन इन तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करके किसी की पहचान और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाकर बनाई गई फर्जी अंतरंग सामग्री मानसिक उत्पीड़न, सामाजिक बदनामी और ब्लैकमेलिंग का माध्यम बन सकती है।
मुजफ्फरपुर की घटना में भी आरोप है कि युवती की तस्वीरों का दुरुपयोग उसकी शादी तुड़वाने के लिए किया गया।ऐसी घटना होने पर क्या करें?यदि किसी व्यक्ति की फर्जी आपत्तिजनक तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाता है, तो संबंधित पोस्ट के लिंक, स्क्रीनशॉट और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए।
इसके बाद तुरंत पुलिस या साइबर अपराध शाखा से संपर्क करना चाहिए।राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामग्री हटाने और फर्जी अकाउंट की रिपोर्ट करने का विकल्प भी उपलब्ध होता है।ऐसी सामग्री को दूसरों तक भेजने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति को और नुकसान पहुंच सकता है।
पुलिस जांच से खुलेगा पूरा मामला
फिलहाल बेला थाना पुलिस चार नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच कर रही है।साइबर सेल की तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आपत्तिजनक वीडियो किसने बनाया और किन अकाउंट से उसे प्रसारित किया गया।
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