
Bihar बिहार: प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से सोमवार को आयोजित ईकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट में देश-विदेश के निवेशकों को बिहार के डैम, तालाब, जंगलों और अन्य प्राकृतिक स्थलों के विकास के लिए आगे आने का आह्वान किया गया।
राज्य सरकार का मानना है कि ईकोटूरिज्म के विस्तार से न केवल बिहार में पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम का उद्घाटन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. राम चंद्र प्रसाद और विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने किया। इस दौरान बिहार में मौजूद प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि बिहार में प्राकृतिक संपदा की कमी नहीं है। राज्य में कई ऐसे जलाशय, वन क्षेत्र, पहाड़ी इलाके और जैव विविधता वाले क्षेत्र मौजूद हैं, जिन्हें विकसित कर पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में बदला जा सकता है।
सरकार की योजना है कि इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं। इसमें ईको फ्रेंडली रिसॉर्ट, एडवेंचर एक्टिविटी, नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग सेंटर, जल पर्यटन और अन्य सुविधाओं को शामिल किया जा सकता है।
निवेशकों को संबोधित करते हुए विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बिहार में ईकोटूरिज्म के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना चाहती है, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
अधिकारियों ने कहा कि ईकोटूरिज्म का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा लाभ स्थानीय समुदायों को भी मिलेगा। स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न प्राकृतिक स्थलों की विशेषताओं को निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया गया। राज्य सरकार ने बताया कि कई जलाशय और वन क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जाए। ईकोटूरिज्म परियोजनाओं में प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग टिकाऊ तरीके से किया जा सके।
मंत्री डॉ. राम चंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार में प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की बड़ी संपदा मौजूद है। जरूरत है कि इन्हें बेहतर तरीके से विकसित कर देश और दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि बिहार को ईकोटूरिज्म के क्षेत्र में एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है और निवेशकों को हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया गया है।
अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने भी कहा कि राज्य में ईकोटूरिज्म के विकास से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक स्थलों के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ईकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट के जरिए सरकार ने निवेशकों को बिहार की पर्यटन क्षमता से परिचित कराया। कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी भाग लिया।
बिहार सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में राज्य के प्राकृतिक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। इसके लिए डैम, तालाब और अन्य जल स्रोतों के आसपास सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि ईकोटूरिज्म के विस्तार से बिहार में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यह पहल बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





