
भागलपुर। खरीक प्रखंड के राघोपुर जमींदारी तटबंध पर पिछले करीब 10 दिनों से जारी गंगा का कटाव अब विकराल रूप ले चुका है। लगातार हो रहे कटाव से तटबंध पर खतरा बढ़ने के बाद शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। तटबंध को किसी भी कीमत पर टूटने से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग ने युद्धस्तर पर बचाव और फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
तटबंध पर लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र और ऊर्जा मंत्री शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल ने सरकार को त्राहिमाम संदेश भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। मंत्रियों की ओर से स्थिति की गंभीरता से सरकार को अवगत कराने के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गए और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया।
बुधवार को आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संतोष कुमार मल्ल और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव चंद्रशेखर प्रसाद सिंह भारी प्रशासनिक अमले के साथ ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने तटबंध के कटाव प्रभावित हिस्सों का निरीक्षण किया और वहां चल रहे बचाव कार्यों की जानकारी ली।
अधिकारियों ने मौके पर मौजूद इंजीनियरों और कर्मचारियों से कटाव की मौजूदा स्थिति, गंगा की धारा के दबाव और तटबंध की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल तटबंध को सुरक्षित रखना और कटाव को आगे बढ़ने से रोकना है।
पिछले करीब 10 दिनों से गंगा की तेज धारा राघोपुर जमींदारी तटबंध के लिए चुनौती बनी हुई है। लगातार मिट्टी कटने से तटबंध के कुछ हिस्सों पर दबाव बढ़ गया है। कटाव का दायरा बढ़ने के साथ ही आसपास के इलाकों में भी चिंता का माहौल है। तटबंध की सुरक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जल संसाधन विभाग ने हालात को देखते हुए फ्लड फाइटिंग का काम तेज कर दिया है। कटाव प्रभावित स्थानों पर आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है और इंजीनियरों की निगरानी में बचाव कार्य किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि गंगा की तेज धारा का दबाव कम कर तटबंध को और नुकसान होने से रोका जाए।
वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से बचाव अभियान की निगरानी भी उच्च स्तर से शुरू हो गई है। संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी टीमों को सतर्क रहने को कहा गया है।
राघोपुर जमींदारी तटबंध की सुरक्षा को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कटाव यदि इसी तरह जारी रहा तो तटबंध के कमजोर हिस्सों पर खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन फिलहाल किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि कटाव रोकने के उपायों को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर भी गंगा के कटाव को लेकर लोगों में बेचैनी है। तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों की निगाहें लगातार नदी की स्थिति पर बनी हुई हैं। गंगा की धारा में होने वाला बदलाव और कटाव की रफ्तार स्थानीय आबादी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
कटाव प्रभावित क्षेत्रों में आम तौर पर नदी की धारा को नियंत्रित करने और मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की फ्लड फाइटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। मौजूदा स्थिति में भी जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक उपाय कर रही है।
दो मंत्रियों की ओर से सरकार को भेजे गए त्राहिमाम संदेश के बाद पूरे मामले ने उच्च स्तर पर ध्यान खींचा। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र और ऊर्जा मंत्री शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल ने तटबंध पर बढ़ते खतरे को गंभीर बताते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत जताई थी। इसके बाद आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
प्रशासन का सबसे बड़ा लक्ष्य तटबंध को टूटने से बचाना है। यदि किसी महत्वपूर्ण तटबंध को नुकसान पहुंचता है तो आसपास के बड़े इलाके में पानी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए बचाव कार्यों में तेजी लाई गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के बीच समन्वय बनाकर स्थिति से निपटने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर और कटाव की स्थिति में किसी भी बदलाव की जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
तटबंध पर चल रहे बचाव कार्यों में पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। तकनीकी टीम लगातार यह आकलन कर रही है कि किस स्थान पर कटाव का दबाव सबसे ज्यादा है और वहां किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
गंगा के किनारे बसे क्षेत्रों में कटाव बड़ी चुनौती माना जाता है। नदी की धारा में बदलाव होने पर किनारे की जमीन तेजी से कटने लगती है और कई बार तटबंध तक खतरा पहुंच जाता है। राघोपुर में भी पिछले 10 दिनों से लगातार जारी कटाव ने ऐसी ही स्थिति पैदा कर दी है।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाल लिया है। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संतोष कुमार मल्ल और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव चंद्रशेखर प्रसाद सिंह की मौजूदगी में बचाव अभियान को तेज किया गया है।
आने वाले समय में गंगा की धारा और कटाव की रफ्तार इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन का दावा है कि तटबंध की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि युद्धस्तर पर चल रहे फ्लड फाइटिंग कार्य से कटाव पर जल्द नियंत्रण पाया जाएगा और राघोपुर जमींदारी तटबंध पर मंडरा रहा खतरा टल सकेगा।





