बिहार

नशा तस्करों पर शिकंजा, मुख्य सचिव ने की बड़ी समीक्षा बैठक

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 3:44 PM IST
नशा तस्करों पर शिकंजा, मुख्य सचिव ने की बड़ी समीक्षा बैठक
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पटना। बिहार में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने नशे के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। इसके तहत मादक पदार्थों की तस्करी रोकने, अवैध नेटवर्क की पहचान करने, आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्य में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों को अधिक सक्रियता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की जब्ती करना नहीं, बल्कि तस्करी से जुड़े संगठित नेटवर्क को कमजोर करना और समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना भी है।
बिहार में नशीले पदार्थों की समस्या पिछले कुछ वर्षों में गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत 1,905 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या पूरे वर्ष 2022 में दर्ज मामलों से भी अधिक है। इन आंकड़ों से राज्य में नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों की बढ़ती चुनौती का पता चलता है। हालांकि, दर्ज मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण पुलिस की अधिक सक्रिय कार्रवाई भी हो सकती है।
नशा मुक्त बिहार अभियान की शुरुआत
राज्य सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 अक्टूबर को पटना में नशा मुक्त बिहार अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 26 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा।इस अभियान का उद्देश्य लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना और नशे की लत से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराना है।अभियान के तहत विभिन्न जिलों में जागरूकता वाहन चलाने, ऑडियो-विजुअल माध्यमों से जानकारी देने और आम नागरिकों को नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।इसके अलावा नशामुक्ति संबंधी सहायता के लिए हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप चैटबॉट जैसी सुविधाओं को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पुलिस अधिकारियों को सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने होंगे। मुख्यमंत्री ने कानून के दायरे में रहकर नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने पर जोर दिया।सरकार की प्राथमिकता नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की पहचान करना और उनके खिलाफ लगातार अभियान चलाना है।इसके साथ ही युवाओं को नशे से बचाने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और परिवारों को अभियान से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
ड्रग्स की जब्ती और गिरफ्तारियों में बढ़ोतरी
बिहार में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य पुलिस की विशेष कार्यबल की नारकोटिक्स इकाई ने 10 अक्टूबर 2026 तक लगभग 52.32 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए थे। इस अवधि में 315 लोगों को गिरफ्तार किया गया।नशीले पदार्थों की जब्ती के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में तस्करी रोकने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, अधिक जब्ती को अपने आप में अवैध कारोबार समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।इसके लिए तस्करी के नेटवर्क, आपूर्ति के स्रोत और नशीले पदार्थों की मांग को कम करने की दिशा में लगातार काम करना आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में भी नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं।राज्यस्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी एनकॉर्ड की आठवीं बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री, जब्ती और गिरफ्तारी से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई।बैठक में नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नशीले पदार्थों की तस्करी से संबंधित मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।इसके अलावा जब्त मादक पदार्थों का नियमानुसार निस्तारण करने और संबंधित मामलों में समय पर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने पर भी ध्यान देने को कहा गया।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास विशेष निगरानी
नशे के खिलाफ अभियान में युवाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन बनाने की दिशा में भी निर्देश जारी किए गए हैं।इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के अवैध कारोबार और इससे जुड़े अपराधों से दूर रखना है।सरकार का मानना है कि युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए परिवार, शिक्षक, शिक्षण संस्थान और समाज की भागीदारी भी आवश्यक है।
सीमावर्ती जिलों और रेलवे मार्गों पर नजर
बिहार की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में सीमावर्ती जिलों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।नेपाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा और अन्य राज्यों से आने वाले प्रमुख मार्गों पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।समीक्षा बैठकों में रेलवे के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के उपायों पर भी चर्चा की गई।अधिकारियों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और तस्करी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
संगठित अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर भी नजर
नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका संबंध संगठित अपराध और अवैध कमाई से भी हो सकता है।ऐसे मामलों में अपराध से अर्जित संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित परिस्थितियों में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।इस प्रकार की वित्तीय जांच से तस्करी में शामिल संगठित गिरोहों के आर्थिक संसाधनों की पहचान की जा सकती है।हालांकि, बिहार के हालिया अभियान में कितनी संपत्ति जब्त की गई या कितने मामलों में वित्तीय जांच पूरी हुई, इसके पुष्ट समेकित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
नशे के खिलाफ समाज की भागीदारी जरूरी
नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के साथ नशे की मांग कम करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए शिक्षा, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं आवश्यक हैं।कई बार नशे की लत से प्रभावित लोग सामाजिक डर और बदनामी के कारण सहायता नहीं लेते। ऐसे में परिवार और समाज का सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।सरकार की ओर से चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देने और जरूरतमंद व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कानून-व्यवस्था मजबूत बनाने की दिशा में पहल
बिहार सरकार की ओर से नशीले पदार्थों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों से राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।अवैध कारोबार पर नियंत्रण, तस्करों की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों की जब्ती और संगठित नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, इन प्रयासों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल गिरफ्तारियों और जब्ती के आंकड़ों से नहीं, बल्कि तस्करी में कमी, न्यायालयों में दोषसिद्धि, नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और युवाओं की सुरक्षा जैसे परिणामों से करना होगा।
राज्य सरकार का नशा मुक्त बिहार अभियान प्रशासनिक सख्ती के साथ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अब इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न विभाग कितने बेहतर समन्वय से काम करते हैं और अभियान का लाभ आम नागरिकों तक किस स्तर पर पहुंचता है।
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