बिहार

गया में ₹100 करोड़ के आरओबी निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, भूमि अधिग्रहण पूरा होने का इंतजार

nidhi
29 Oct 2026 10:22 AM IST
गया में ₹100 करोड़ के आरओबी निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, भूमि अधिग्रहण पूरा होने का इंतजार
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बागेश्वरी गुमटी पर फिर शुरू हुआ आरओबी का काम
गया: बागेश्वरी रेलवे गुमटी पर प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया है। पितृपक्ष मेला और दुर्गा पूजा के दौरान जिला प्रशासन के निर्देश पर काम रोका गया था। अब उत्तर दिशा में पिलर निर्माण आगे बढ़ाया जा रहा है। करीब 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण से जुड़ी बाधाएं अभी दूर होनी बाकी हैं। रेलवे फाटक पर बार-बार रुकने वाले यातायात के बीच यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। पुल बनने के बाद वाहनों को रेल लाइन पार करने के लिए फाटक खुलने का इंतजार कम करना पड़ेगा। हालांकि निर्माण दोबारा शुरू होना परियोजना पूरी होने की दिशा में एक कदम है; निर्धारित अवधि में काम समाप्त करने के लिए आगे के निर्माण क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध होना भी जरूरी रहेगा।
690 मीटर लंबा होगा दो लेन का पुल
प्रकाशित विवरण के अनुसार, आरओबी की लंबाई 690 मीटर और चौड़ाई 7.5 मीटर होगी। दो लेन के इस पुल में 27 पिलर तथा दो बॉक्स का प्रावधान है। स्थानीय आवाजाही के लिए दो सर्विस लेन भी योजना में शामिल हैं। पहसी और लोको क्षेत्र के लोगों को इससे सुविधा मिलने की उम्मीद है। आरओबी और सर्विस लेन की भूमिकाएं अलग होंगी। ऊपर से गुजरने वाला मार्ग रेलवे लाइन पार करने वाले वाहनों के लिए उपयोगी होगा, जबकि नीचे की स्थानीय सड़कें आसपास के मोहल्लों और प्रतिष्ठानों तक पहुंच में मदद करेंगी। निर्माण के दौरान दोनों तरह की आवाजाही का समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।
दक्षिणी हिस्से में दीवाली बाद काम की तैयारी
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, दीवाली के बाद केंद्रीय विद्यालय की ओर दक्षिणी हिस्से में भी पिलर बनाने की तैयारी है। संबंधित क्षेत्र की अतिक्रमित सरकारी जमीन खाली कराने के लिए प्रशासन से आग्रह किया गया है। मौके पर चलंत बैरिकेडिंग लगाकर यातायात बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। निर्माण स्थल के आसपास रास्ते की उपलब्ध चौड़ाई बदल सकती है। ऐसे में वाहन चालकों को मौके पर लगी बैरिकेडिंग और यातायात संकेतों के अनुसार चलना होगा। किसी पुराने डायवर्जन को वर्तमान व्यवस्था मान लेने के बजाय स्थानीय निर्देश देखना उपयोगी रहेगा।
मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होना बाकी
परियोजना की प्रमुख अड़चन भूमि अधिग्रहण है। रिपोर्ट में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के हवाले से बताया गया है कि मौजा संबंधी तकनीकी समस्या सुधारकर मामला दोबारा गजट प्रकाशन के लिए भेजा गया है। प्रकाशन के बाद भूमि मालिकों के दावे लेकर मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस चरण का निर्माण से सीधा संबंध है। जमीन पर काम की जरूरत होने और उसके विधिवत उपलब्ध होने के बीच अंतर रहता है। दावों और भुगतान का निपटारा समय पर होने से एजेंसी को आगे के हिस्सों में काम करने की सुविधा मिल सकती है।
पहले भी समय लगा था काम शुरू होने में
यह परियोजना पहले से प्रक्रियागत देरी का सामना करती रही है। प्रभात खबर की 17 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भूमिपूजन के लगभग पांच महीने बाद 16 जुलाई को पहले पिलर के लिए खुदाई शुरू हुई थी। उस समय तकनीकी प्रक्रियाओं, यातायात व्यवस्था और वैकल्पिक मार्ग तय करने में समय लगने की जानकारी सामने आई थी। काम शुरू करने से पहले रेलवे, जिला प्रशासन और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधिकारियों के बीच समन्वय हुआ था। जुलाई की रिपोर्ट में एजेंसी ने लगभग दो वर्ष के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य बताया था। अब ताजा रिपोर्ट में 2027 की समयसीमा दी गई है। इसलिए अंतिम पूर्णता तिथि का आकलन अद्यतन विभागीय कार्यक्रम और वास्तविक प्रगति के आधार पर करना होगा।
भूमि से जुड़ी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही
जून 2025 में प्रकाशित मगध लाइव की रिपोर्ट में भी परियोजना की फाइल जिला भू-अर्जन कार्यालय पहुंचने की जानकारी दी गई थी। उस समय संरेखण के अनुसार आवश्यक जमीन की पहचान और आगे अधिग्रहण की प्रक्रिया का उल्लेख था। इससे पता चलता है कि जमीन की उपलब्धता परियोजना की शुरुआती तैयारियों से ही महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। संरेखण से यह तय होता है कि पुल और पहुंच मार्ग किन भूखंडों से गुजरेंगे। इसी आधार पर जमीन की जरूरत और प्रभावित संपत्तियों का विवरण तैयार होता है। बाद के चरणों में रिकॉर्ड संबंधी सुधार आवश्यक हों तो उनका असर प्रक्रिया की गति पर पड़ सकता है।
व्यस्त रेलवे फाटक पर राहत की उम्मीद
प्रभात खबर की रिपोर्ट में बागेश्वरी गुमटी को शहर के व्यस्त रेलवे फाटकों में बताया गया है। ट्रेनों के गुजरने पर फाटक बंद होने से वाहनों की कतार लगती है और स्कूल, अस्पताल तथा बाजार जाने वालों को परेशानी होती है। आरओबी का उद्देश्य इसी अवरोध को कम करना है। अब परियोजना की प्रगति के दो पहलू साथ-साथ महत्वपूर्ण होंगे—उपलब्ध जमीन पर निर्माण और शेष जमीन संबंधी प्रक्रिया का निपटारा। नागरिकों को वास्तविक राहत पुल तथा पहुंच मार्ग चालू होने के बाद मिलेगी। फिलहाल काम दोबारा शुरू होने से उम्मीद बढ़ी है, जबकि समयसीमा पूरी करने के लिए प्रशासनिक और निर्माण स्तर पर निरंतर समन्वय की जरूरत बनी हुई है।
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