
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक विवाद तेज होता जा रहा है। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता से जुड़े सवाल उठाना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। ये विपक्ष के आरोप हैं, जिन पर चुनाव आयोग अलग रुख रखता है।
#WATCH | दिल्ली | कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर कहा, "एक तो ये लोग नागरिकता तय करने लगे, जिसका चुनाव आयोग को अधिकार नहीं है। दूसरी बात ये कि SIR जिन चुनावी राज्यों में हुआ, चाहें वो दिल्ली में हो, बिहार में हो, बंगाल में हो या महाराष्ट्र में हो, सभी जगह भारी गड़बड़ियां हो रही हैं..." उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी लगातार इस विषय को उठाते रहे हैं। आज या कल जो भी जवाब होगा, वो देना ही होगा। चुनाव आयोग हो या कोई भी व्यक्ति जो किसी पद पर बैठा है, वह जनता के प्रति जवाबदेह है। 'दूध का दूध-पानी का पानी' होना ही चाहिए..."
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 29, 2026
कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी का भी समर्थन किया। राहुल गांधी ने हाल के दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के पद से हटने की मांग की है। वर्तमान में ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को जनता के सामने जवाबदेह रहना चाहिए और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर उठ रहे आरोपों और चुनाव आयोग के जवाबों की पूरी तस्वीर सामने आनी चाहिए।
SIR को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, सत्यापन प्रक्रिया और आयोग के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आयोग ने प्रक्रिया से जुड़े कई आरोपों को खारिज भी किया है। आयोग की ओर से ECINet पोर्टल की समीक्षा और कुछ मतदाताओं के लिए घर-घर सत्यापन जैसे कदमों की भी जानकारी दी गई है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांग रहा है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल आयोग के स्पष्टीकरण का समर्थन करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं।





