
पटना। बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में अगले वर्ष से कम्प्यूटर की शिक्षा अनिवार्य की जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को दानापुर स्थित एक सरकारी स्कूल में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें निजी विद्यालयों के समकक्ष बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने को समय की आवश्यकता बताया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को दानापुर के बाटागंज स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक पहुंचे थे। यहां आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद किया। इसी दौरान उन्होंने सरकारी विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष से बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में कम्प्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और बदलते समय के अनुसार उनकी शिक्षा को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों के लिए तकनीकी जानकारी बेहद जरूरी हो गई है।
सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य होने के बाद विद्यार्थियों को सामान्य विषयों के साथ तकनीकी शिक्षा से भी जुड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास सरकारी विद्यालयों में ऐसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का है, जिससे वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
उन्होंने सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच सुविधाओं के अंतर को कम करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित कर उन्हें निजी स्कूलों के समकक्ष बनाया जाएगा। कम्प्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की घोषणा को इसी दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए उनकी पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अभिभावकों से भी संवाद किया और बच्चों की शिक्षा में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में शिक्षकों से भी स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर बातचीत की गई।
अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के माध्यम से विद्यालय, शिक्षक और अभिभावकों के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। इसी कार्यक्रम के दौरान सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात प्रमुखता से सामने आई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कम्प्यूटर और डिजिटल तकनीक का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। शिक्षा से लेकर रोजगार तक तकनीकी जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी शुरुआती स्तर से कम्प्यूटर की जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य होने से विद्यार्थियों को तकनीक को समझने और उसका उपयोग सीखने का अवसर मिलेगा। स्कूल स्तर पर तकनीकी शिक्षा मिलने से आगे की पढ़ाई में भी विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकता है। खासकर ऐसे विद्यार्थी जिनके घरों में कम्प्यूटर या अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए विद्यालय में कम्प्यूटर शिक्षा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब अगले वर्ष से सरकारी विद्यालयों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी महत्वपूर्ण होगी। बिहार में बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालय संचालित हैं और इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक कम्प्यूटर शिक्षा पहुंचाने के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी।
सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों के समकक्ष बनाने के मुख्यमंत्री के लक्ष्य में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कम्प्यूटर शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को तकनीक आधारित पढ़ाई से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना अब विकल्प नहीं, बल्कि समय की जरूरत है। तेजी से बदलती दुनिया में तकनीकी जानकारी के बिना विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण स्कूल स्तर से ही कम्प्यूटर शिक्षा देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।
दानापुर के राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने स्कूल में पढ़ाई के माहौल और विद्यार्थियों की जरूरतों को समझने की कोशिश की। अभिभावकों और शिक्षकों के साथ हुई बातचीत में भी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर रहा।
कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया को समझने में मदद मिल सकती है और भविष्य में उच्च शिक्षा एवं रोजगार के लिए आवश्यक बुनियादी तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।
सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी विद्यालयों के बच्चों को भी ऐसी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उपलब्ध होती हैं।
अगले वर्ष से कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य होने की घोषणा के बाद बिहार के सरकारी विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। अब इस व्यवस्था को लागू करने के लिए स्कूलों में आवश्यक कम्प्यूटर संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और शिक्षण व्यवस्था किस तरह विकसित की जाती है, इस पर नजर रहेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा के मुताबिक राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों को नई व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर कम्प्यूटर सीखने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य आधुनिक सुविधाओं के जरिए सरकारी स्कूलों को मजबूत करना और विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है।





