बिहार

बिहार में बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की समीक्षा

Ratna Netam
6 Oct 2026 9:58 PM IST
बिहार में बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की समीक्षा
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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में हुए नुकसान का आकलन जल्द पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए, ताकि राहत, पुनर्वास और आगे की आवश्यक कार्रवाई तेजी से की जा सके। बिहार सरकार पिछले कुछ सप्ताह से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चला रही है।प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार समीक्षा बैठक लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित की गई। बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद नितिन नवीन भी मौजूद रहे। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने बाढ़ की मौजूदा स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों और अब तक हुए नुकसान से संबंधित जानकारी रखी।
बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री को राज्य में आई बाढ़ के कारणों और दो अलग-अलग चरणों में पैदा हुई स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बिहार जल संसाधन विभाग के अनुसार राज्य में बाढ़ नियंत्रण, तटबंधों के रखरखाव, जल निकासी और नदी प्रबंधन की जिम्मेदारी विभाग के प्रमुख कार्यों में शामिल है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों से वास्तविक स्थिति का पूरा ब्योरा जुटाया जाए। इसमें लोगों के घरों, फसलों, सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।
बिहार में इस वर्ष बाढ़ के कारण कई जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तर बिहार के कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण गांवों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। सितंबर के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम चंपारण समेत कई बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था और राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए थे।मुख्यमंत्री ने उस दौरान राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया था। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय और पशुओं के लिए राहत व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने और राहत सामग्री के वितरण में किसी तरह की कमी नहीं होने देने का निर्देश दिया गया था।
राज्य सरकार ने इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन को अलर्ट रहने का निर्देश दिया था। सितंबर की शुरुआत में हुई एक समीक्षा बैठक में जिला अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रखने, निचले इलाकों की निगरानी और तटबंधों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। उस समय SDRF और NDRF की टीमों को भी राहत कार्यों में लगाया गया था।मंगलवार की बैठक में बाढ़ से हुए नुकसान के साथ-साथ भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के उपायों पर भी चर्चा हुई। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने नदी प्रणाली, जलस्तर और उन परिस्थितियों की जानकारी दी, जिनकी वजह से अलग-अलग समय पर बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई।
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि सिर्फ मौजूदा नुकसान का आकलन ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी ठोस रणनीति बनाई जाए। बार-बार बाढ़ की चपेट में आने वाले क्षेत्रों की पहचान, तटबंधों की मजबूती, कटाव रोकने और जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।सितंबर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान वैशाली, मुंगेर और भागलपुर समेत कई इलाकों की स्थिति का जायजा लिया गया था। केंद्र ने भी प्रभावित क्षेत्रों को आवश्यक सहयोग देने की बात कही थी।
बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है। खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान होने से किसानों की चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में नुकसान का सही आकलन राहत और मुआवजा तय करने के लिए अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसी वजह से अधिकारियों को विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार करने का निर्देश दिया है।सरकार की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के साथ सामान्य स्थिति बहाल करना है। सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाओं को पूरी तरह सामान्य करने के लिए भी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस समीक्षा बैठक से साफ है कि राज्य सरकार अब राहत कार्यों के साथ-साथ बाढ़ से हुए कुल नुकसान का विस्तृत आकलन करने पर जोर दे रही है। अधिकारियों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे पुनर्वास, आधारभूत ढांचे की मरम्मत और प्रभावित लोगों के लिए सहायता संबंधी फैसले लिए जाने की संभावना है।
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