
बिहार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे और उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। यह बैठक लगभग आधे घंटे तक चली, जिसमें बिहार की प्रमुख सड़क परियोजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र, विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को बिहार की सड़क कनेक्टिविटी को तेज गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान राज्य में चल रही और प्रस्तावित कई बड़ी सड़क परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे और रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल रहे। अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन गई है। इसके साथ ही जिन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण या अतिक्रमण की वजह से काम रुका हुआ था, उनके समाधान पर भी सहमति बनी है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि बाधाओं को तेजी से दूर कर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने केंद्र के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत बिहार में कई फोरलेन हाईवे को सिक्सलेन में बदला जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुसार सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाना है। साथ ही जिन क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण की समस्या या वन विभाग की मंजूरी में देरी के कारण परियोजनाएं अटकी हुई हैं, वहां तेजी से प्रक्रिया पूरी करने पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस बैठक के बाद कहा कि बिहार की सड़क परियोजनाओं को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह मुलाकात की गई। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क ढांचे को आधुनिक और विस्तृत बनाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि आवागमन सुगम हो सके और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिले।
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं भी चल रही हैं। इन चर्चाओं के बीच हुई यह मुलाकात राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे केवल विकास परियोजनाओं से जुड़ी समीक्षा बैठक बताया गया है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो सकता है।





