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बिहार MLC चुनाव में कांटे की टक्कर, 8 सीटों पर 150 उम्मीदवार मैदान में

Kavita2
22 Oct 2026 9:57 AM IST
बिहार MLC चुनाव में कांटे की टक्कर, 8 सीटों पर 150 उम्मीदवार मैदान में
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पटना। बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को प्रदेश की आठ सीटों पर मतदान होगा। इन सीटों पर कुल 5 लाख 32 हजार 847 मतदाता 150 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), विपक्षी महागठबंधन, जनसुराज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच कई सीटों पर आपसी सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण राजद, कांग्रेस और वाम दलों के प्रत्याशी भी आमने-सामने हैं। इससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। बुधवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद प्रत्याशी अब बूथ प्रबंधन और मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क पर ध्यान दे रहे हैं।

आठ सीटों पर शुक्रवार को होगा मतदान

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने मतदान की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।

चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होंगे। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, कोसी और तिरहुत शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की सीटें शामिल हैं।

निर्वाचन संबंधी प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, मतदान के लिए कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 598 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 335 मतदान केंद्र निर्धारित हैं।

सभी मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

5.32 लाख मतदाता चुनेंगे आठ प्रतिनिधि

विधान परिषद चुनाव में कुल 5,32,847 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 3,86,199 पुरुष, 1,46,611 महिला और 37 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर कुल 4,92,594 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें सबसे अधिक 1,43,988 मतदाता तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हैं।

इसके बाद कोसी में 1,34,072, दरभंगा में 1,26,951 और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 87,583 मतदाता हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर कुल 40,253 मतदाता हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 11,719 मतदाता हैं। सारण में 10,748, दरभंगा में 9,026 और तिरहुत में 8,760 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

164 नामांकन में से 150 उम्मीदवार मैदान में

विधान परिषद की आठ सीटों के लिए कुल 164 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दस्तावेजों की कमी और अन्य त्रुटियों के कारण 12 उम्मीदवारों के पर्चे निरस्त कर दिए गए। इसके बाद दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।

इस प्रकार अब चुनाव मैदान में कुल 150 प्रत्याशी बचे हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की चार सीटों पर 90 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चार सीटों पर 60 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

प्रत्याशियों की बड़ी संख्या के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। इससे जीत-हार का अंतर कम रहने की संभावना भी जताई जा रही है।

महागठबंधन में सीट बंटवारे पर नहीं बनी सहमति

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो पाना है।

राष्ट्रीय जनता दल ने छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने पांच सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं।

कई सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। वाम दलों के उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी कुछ सीटों पर मुकाबले को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

पटना शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ कोसी और दरभंगा स्नातक सीटों पर एनडीए के खिलाफ विपक्षी दलों के उम्मीदवारों के बीच भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

राजनीतिक दृष्टि से यह स्थिति महागठबंधन के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि एक जैसे मतदाता समूहों का समर्थन कई उम्मीदवारों के बीच बंटने की संभावना है।

जनसुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़ाई चुनौती

बिहार विधान परिषद के इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।

एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवारों के सामने जनसुराज के साथ कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं।

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान और मतदाताओं से संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी कई स्थानों पर प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को चुनौती दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता और मतदाताओं तक पहुंच चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

सभी आठ वर्तमान प्रतिनिधि फिर मैदान में

विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनके वर्तमान प्रतिनिधि भी दोबारा चुनाव मैदान में हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना से नीरज कुमार, दरभंगा से सर्वेश कुमार, तिरहुत से बंशीधर ब्रजवासी और कोसी से एनके यादव वर्तमान सदस्य हैं।

इसी तरह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना से नवल किशोर यादव, दरभंगा से मदन मोहन झा, तिरहुत से संजय कुमार सिंह और सारण से आफाक अहमद वर्तमान प्रतिनिधि हैं।

इन सभी नेताओं के सामने अपनी सीट बचाए रखने की चुनौती है। दूसरी ओर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार बदलाव के मुद्दे पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के मुद्दे अहम

विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग चुनावी समीकरण देखने को मिलते हैं।

इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत पात्र स्नातक और शिक्षक ही मतदान कर सकते हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं, वेतन, पदोन्नति और शैक्षणिक व्यवस्था जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।

वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, उच्च शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा में रहते हैं।

इन मुद्दों पर उम्मीदवारों के रुख और उनकी पिछली उपलब्धियों का असर मतदान पर पड़ सकता है।

27 अक्टूबर को होगी मतगणना

मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतपेटियों को निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत मतगणना केंद्रों पर रखा जाएगा।

निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

विधान परिषद की इन आठ सीटों के चुनाव को बिहार के प्रमुख राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और चुनावी रणनीति की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि एनडीए अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने में कितना सफल होता है और महागठबंधन के भीतर उम्मीदवारों की आपसी प्रतिस्पर्धा का चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ता है।

इसके साथ ही जनसुराज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर भी राजनीतिक दलों की निगाहें रहेंगी।

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