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बिहार अस्पताल में फ्रैक्चर मरीज के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड बांधने का दावा, वीडियो वायरल

nidhi
7 Aug 2026 7:33 AM IST
बिहार अस्पताल में फ्रैक्चर मरीज के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड बांधने का दावा, वीडियो वायरल
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बिहार के एक सरकारी अस्पताल का वीडियो वायरल होने के बाद इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठे। फ्रैक्चर मरीज के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड बांधने का दावा, स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।

मंझौल (बेगूसराय) : बिहार के एक सरकारी अस्पताल से सामने आए एक वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया जा रहा है कि फ्रैक्चर हुए पैर पर प्लास्टर करने के बजाय कार्डबोर्ड (जिसे कई जगह गलत तरीके से 'कार्टून' लिखा जा रहा है) बांध दिया गया। इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी और यदि इलाज में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में एक मरीज के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड के टुकड़े को पट्टी से बांधकर स्थिर (Immobilize) करने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और चिकित्सा सुविधाओं पर सवाल उठाए।
हालांकि, वायरल वीडियो में किए जा रहे सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का कहना है कि यदि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही या निर्धारित चिकित्सा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन से भी पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रैक्चर की स्थिति में प्राथमिक उपचार के दौरान कुछ परिस्थितियों में अस्थायी स्प्लिंट (Temporary Splint) के रूप में कठोर सामग्री, जैसे कार्डबोर्ड या लकड़ी के सपोर्ट का उपयोग मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए किया जा सकता है। इसके बाद मरीज की जांच कर आवश्यक होने पर प्लास्टर या अन्य उपयुक्त उपचार किया जाता है।
ऐसे में किसी वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले यह जानना जरूरी है कि संबंधित सामग्री अस्थायी स्प्लिंट के रूप में इस्तेमाल की गई थी या प्लास्टर के विकल्प के रूप में।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, उपचार की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में मानकों के विपरीत इलाज किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

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