बिहार

बिहार के हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूल, निजी स्कूलों जैसी मिलेंगी सुविधाएं

Kavita2
25 Sept 2026 10:08 AM IST
बिहार के हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूल, निजी स्कूलों जैसी मिलेंगी सुविधाएं
x

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक और उन्नत शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार नई योजना पर काम कर रही है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक राज्य के सभी 38 जिलों में कम से कम एक सरकारी विद्यालय को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन विद्यालयों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और खेल-कूद की बेहतर सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जो राष्ट्रीय स्तर के निजी विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप हो।

योजना के तहत प्रत्येक जिले के पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले सरकारी विद्यालयों की पहचान की जाएगी। चयनित विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदला जाएगा। इसके लिए स्कूल भवन से लेकर कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और खेल मैदान तक को आधुनिक बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। शिक्षा विभाग चयन के लिए स्कूलों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध जमीन, विद्यार्थियों की संख्या और अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे पहलुओं को ध्यान में रखेगा।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए केवल भवन निर्माण तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होने वाले विद्यालयों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि बच्चे बदलते समय के अनुरूप पढ़ाई कर सकें।

इन विद्यालयों में स्मार्ट और डिजिटल क्लासरूम विकसित किए जाएंगे। डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों के जरिए शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की योजना है। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

कंप्यूटर शिक्षा को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही डिजिटल तकनीक से परिचित कराने के लिए कंप्यूटर लैब विकसित करने की तैयारी है। इससे बच्चों को सामान्य विषयों की पढ़ाई के साथ डिजिटल कौशल सीखने का अवसर मिलेगा। स्कूलों में इंटरनेट आधारित शिक्षण सामग्री के उपयोग की व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है, जिससे विद्यार्थियों को अतिरिक्त अध्ययन सामग्री तक पहुंच मिल सके।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में पुस्तकालयों को भी बेहतर बनाया जाएगा। पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं, विज्ञान, साहित्य, इतिहास, सामान्य ज्ञान और अन्य विषयों से जुड़ी किताबें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने और उनकी रुचि के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में पुस्तकालयों को आधुनिक स्वरूप देने की योजना है।

सरकार की योजना केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी। खेल-कूद और अन्य गतिविधियों के लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। चयनित स्कूलों में उपलब्ध जगह के अनुसार खेल मैदान, इनडोर गेम और विभिन्न खेलों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ उनकी प्रतिभा को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।

शिक्षा विभाग की योजना में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी शामिल है। कक्षाओं की मरम्मत और जरूरत के अनुसार नए कमरों का निर्माण, स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, बिजली और बेहतर परिसर जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा। विद्यालय परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के साथ बच्चों के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल तभी संभव होगा, जब शिक्षक भी नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित हों। ऐसे में शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर भी काम किए जाने की तैयारी है। सरकार की कोशिश है कि आधुनिक संसाधनों के साथ पढ़ाने की पद्धति में भी सुधार हो, जिससे इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिल सके।

बिहार में सरकारी स्कूलों की बड़ी संख्या है और इनमें लाखों विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में प्रत्येक जिले में एक मॉडल स्कूल तैयार करने की योजना को शिक्षा विभाग अन्य विद्यालयों के लिए उदाहरण के रूप में भी देख रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनाई जाने वाली सफल व्यवस्थाओं को भविष्य में दूसरे सरकारी स्कूलों तक विस्तारित किया जा सकता है।

सरकार का दावा है कि सरकारी विद्यालयों में संसाधनों और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने से अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा। अब तक निजी स्कूलों से जोड़ी जाने वाली स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब, बेहतर पुस्तकालय और खेल सुविधाओं को सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध कराने की दिशा में यह योजना तैयार की गई है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता चयनित स्कूलों में संसाधनों के विकास, पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता और सुविधाओं के नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगी।

शिक्षा विभाग अब सभी 38 जिलों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए उपयुक्त विद्यालयों के चयन और योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। पहले चरण में प्रत्येक जिले में कम से कम एक विद्यालय को आधुनिक स्वरूप देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अनुभव और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजना का विस्तार किया जा सकता है।

राज्य सरकार के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं केवल निजी विद्यालयों तक सीमित न रहें। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रयोगशालाओं, बेहतर पुस्तकालय, खेल सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण का लाभ मिले। सभी 38 जिलों में प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूल इसी दिशा में सरकार की नई पहल के रूप में सामने आए हैं।

Next Story