बिहार
दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या का मामला, पति दोषी करार
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 11:19 PM IST

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बगहा। बिहार के बगहा में दहेज से जुड़े एक गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गर्भवती पत्नी संध्या यादव की हत्या के मामले में उनके पति प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को दोषी करार दिया गया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में आरोपी की मां यानी मृतका की सास को अदालत ने बरी कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत अब दोषी पति को कितनी सजा दी जाएगी, इस पर 20 नवंबर 2026 को दलीलें सुनेगी। इस फैसले के बाद मृतका के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
मामला दहेज से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप था कि संध्या यादव को शादी के बाद से ही दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी विवाद के बीच उनकी हत्या कर दी गई। घटना के समय संध्या गर्भवती थीं। गर्भवती महिला की हत्या के इस मामले ने इलाके में गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन किया। सुनवाई और उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद न्यायालय ने प्रमोद यादव को अपनी पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी पाया। वहीं, सास के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।
पति को हत्या का दोषी पाया
इस मामले में मुख्य आरोपी प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव था। अदालत ने उसे पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी करार दिया है। दहेज प्रताड़ना से जुड़े आरोपों के बीच हुई इस हत्या को लेकर मुकदमा चल रहा था। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद पति की आपराधिक जिम्मेदारी निर्धारित की।किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि का फैसला सुनाने से पहले अदालत को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का मूल्यांकन करना होता है। इस मामले में भी अदालत ने दोनों आरोपियों की भूमिका को अलग-अलग देखा। इसी आधार पर पति को दोषी ठहराया गया, जबकि सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
साक्ष्य के अभाव में सास को मिली राहत
इस मामले में आरोपी पति के साथ उसकी मां को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद उन्हें बरी कर दिया गया।अदालत का यह फैसला आपराधिक न्याय व्यवस्था के उस सिद्धांत को भी दर्शाता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को केवल पारिवारिक संबंध या आरोप के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष को प्रत्येक आरोपी के खिलाफ उसकी भूमिका और अपराध में संलिप्तता साबित करनी होती है।इस मामले में पति और सास के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग परीक्षण किया गया। नतीजतन, पति को हत्या का दोषी करार दिया गया, जबकि सास को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण राहत मिली।
20 नवंबर को सजा पर होगी सुनवाई
अदालत ने दोषी प्रमोद यादव की सजा की अवधि और उसके निर्धारण पर दलीलें सुनने के लिए 20 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। इस दिन अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष सजा के निर्धारण को लेकर अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे।अदालत इन दलीलों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सजा तय करेगी। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के बाद सजा का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण होता है।सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपराध की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को सामने रख सकता है। वहीं, बचाव पक्ष दोषी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दलीलें पेश कर सकता है। इसके बाद अदालत कानून के प्रावधानों के अनुसार अंतिम आदेश पारित करेगी।
दहेज प्रताड़ना का मामला फिर चर्चा में
बगहा का यह मामला एक बार फिर दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को चर्चा में ले आया है। देश में दहेज निषेध कानून लागू होने के बावजूद कई परिवारों में विवाह के बाद महिलाओं को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।दहेज की मांग को लेकर होने वाली हिंसा कई बार गंभीर आपराधिक घटनाओं में बदल जाती है। महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।संध्या यादव की हत्या का मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि घटना के समय वह गर्भवती थीं। एक गर्भवती महिला की हत्या ने इस मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। अदालत द्वारा पति को दोषी ठहराए जाने के बाद अब सभी की नजरें 20 नवंबर को होने वाली सजा संबंधी सुनवाई पर टिकी हैं।
न्यायिक फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया
अदालत ने दोषसिद्धि और सजा निर्धारण की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया है। पहले चरण में यह तय किया गया कि आरोपी पति के खिलाफ हत्या का अपराध साबित हुआ है। अब दूसरे चरण में यह निर्धारित किया जाएगा कि कानून के तहत उसे कितनी सजा दी जानी चाहिए।वहीं, सास को बरी किए जाने का अर्थ है कि अदालत को उनके खिलाफ दोषसिद्धि के लिए आवश्यक साक्ष्य नहीं मिले। इस प्रकार न्यायालय ने मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका के आधार पर अलग-अलग निर्णय दिया है।फिलहाल बगहा की अदालत ने प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को गर्भवती पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी करार दिया है। सास को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। अब 20 नवंबर 2026 को सजा की अवधि निर्धारित करने के लिए सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत का अंतिम सजा संबंधी आदेश सामने आएगा।
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