बिहार

जमीन खरीद बिक्री पर बड़ा फैसला कैबिनेट की मुहर

Ratna Netam
12 Aug 2026 8:17 PM IST
जमीन खरीद बिक्री पर बड़ा फैसला कैबिनेट की मुहर
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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार शाम हुई मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास, ऊर्जा, शिक्षा, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने कुल 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें ग्रीनफील्ड सैटलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक हटाने से लेकर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता तक के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा युवाओं के कौशल विकास, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
कैबिनेट ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गयाजी और बिहारशरीफ में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन प्लांटों की स्थापना से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही जैविक कचरे के बेहतर उपयोग की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार राज्य में वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े एक प्रस्ताव में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत संजय कुमार को लेकर भी फैसला लिया गया। संजय कुमार 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। कैबिनेट ने सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एक वर्ष के लिए संविदा के आधार पर नियोजित करने की स्वीकृति प्रदान की है।
ऊर्जा क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण फैसला प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत आवासीय उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की सहायता के अतिरिक्त बिहार सरकार की ओर से भी वित्तीय मदद दी जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। लाभार्थियों को 10 हजार रुपये प्रति किलोवाट की दर से अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति उपभोक्ता तक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिल सकेगी।
बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अधीन ग्रिड उपकेंद्र कार्यालयों में कुल 221 नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी गई है। इनमें विद्युत कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और विद्युत अभियंता सहित विभिन्न पद शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ग्रिड उपकेंद्रों के संचालन और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारतनेट से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। गांवों तक भारतनेट की सुविधा पहुंचाने के लिए भारत सरकार, बीबीएनएल और बिहार सरकार के बीच समझौता किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
युवाओं के लिए कैबिनेट ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत कुशल युवा कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए 430.08 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कार्यक्रम में युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सोलर, नेटवर्किंग, डिजिटल मार्केटिंग, बैंकिंग, टेली, विदेशी भाषा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि कार्यक्रम से सीधे तौर पर 6,436 रोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं, जबकि हर साल 2.57 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
छात्रों के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को भी वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक विस्तार देने का फैसला लिया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए योजना पर खर्च करने के लिए 950 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत अब तक 4.81 लाख से ज्यादा आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 4.15 लाख से अधिक विद्यार्थियों को करीब 8,865 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।
शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में संचालित एकल निजी शिक्षण संस्थानों को बहुविषयक डिग्री कॉलेज के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। वहीं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई की नामांकन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब निजी आईटीआई की कुल स्वीकृत सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों पर नामांकन बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा परिषद, पटना के माध्यम से कराया जाएगा।
इन फैसलों के साथ बिहार सरकार ने ऊर्जा, रोजगार, कौशल विकास, उच्च शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर एक साथ फोकस किया है। खास तौर पर सूर्य घर योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के लिए 950 करोड़ रुपये की मंजूरी को आम उपभोक्ताओं और विद्यार्थियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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