
पूर्णिया। जिले में पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। महज आठ दिनों के भीतर पुल से जुड़ी दो घटनाएं सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ताजा मामला कसबा प्रखंड के मोहनी पंचायत में सौरा नदी पर बने पुल का है, जो निर्माण के करीब एक साल बाद ही कमजोर होकर धंसने लगा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में तय मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से कम समय में ही पुल की संरचना कमजोर हो गई। पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास की कई पंचायतों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक साल में ही पुल की हालत खराब
जानकारी के अनुसार, कसबा प्रखंड के मोहनी पंचायत में सौरा नदी पर करीब 14 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था। यह पुल ग्रामीणों के आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
बताया जा रहा है कि 29 अगस्त को अचानक पुल के मध्य हिस्से में धंसाव हो गया। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी।
हालांकि, छोटे वाहनों और पैदल आने-जाने वाले लोगों के लिए भी यह पुल अब खतरे का कारण बन गया है।
पांच पंचायतों के लोगों की बढ़ी परेशानी
गेरुआ चौक के पूर्व बने इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास की करीब पांच पंचायतों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा था। लोग इसी रास्ते से बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए आते-जाते थे।
पुल में धंसाव के बाद अब लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ गए हैं।
निर्माण में अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने पुल निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुल बनाने में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई।
लोगों का आरोप है कि पुल में पर्याप्त मात्रा में सरिया और अन्य जरूरी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसी कारण पुल मजबूत नहीं बन पाया और महज एक साल के भीतर ही उसकी हालत खराब हो गई।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
15वीं वित्त योजना से हुआ था निर्माण
बताया जा रहा है कि यह पुल 15वीं वित्त योजना के तहत बनाया गया था। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना था।
लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद पुल में आई खराबी ने योजना के तहत किए गए कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद अगर लोगों को सुविधा नहीं मिलती तो यह गंभीर मामला है।
आठ दिनों में दूसरी घटना से बढ़ी चिंता
जिले में महज आठ दिनों के भीतर पुल से जुड़ी दो घटनाएं सामने आने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
एक ओर जहां सौरा नदी पर बना पुल धंस गया, वहीं दूसरी घटना ने भी पुल निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर पुलों की जांच और मरम्मत जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
भारी वाहनों पर लगाई गई रोक
पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है।
अधिकारियों का मानना है कि पुल की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा सबसे जरूरी है। फिलहाल पुल की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर प्रक्रिया चल रही है।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पुल निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत बनने वाली संरचनाओं में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि इनका सीधा असर आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा होता है।





