बिहार

भाजपा के अभेद्य किले में सेंध, जन सुराज के प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत

Ratna Netam
3 Aug 2026 9:38 PM IST
भाजपा के अभेद्य किले में सेंध, जन सुराज के प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत
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पटना : बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बड़ा सियासी उलटफेर कर दिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में जीत दर्ज कर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 मतों के बड़े अंतर से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया है। उनकी यह जीत न केवल जन सुराज पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि भाजपा के लिए भी एक बड़ा झटका है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी परिणामों के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट मिले। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। मतों के आंकड़ों से साफ है कि प्रशांत किशोर ने भाजपा और राजद दोनों को पीछे छोड़ते हुए बांकीपुर में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया है।

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। इस क्षेत्र से पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा लगातार तीन बार विधायक रहे थे। इसके बाद वर्ष 2006 में उनके बेटे नितिन नवीन ने उपचुनाव जीतकर इस सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा। नितिन नवीन 2025 तक बांकीपुर सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। उनके भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा जाने से यह सीट खाली हुई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया गया।

प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम था, क्योंकि उन्होंने पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। जन सुराज अभियान के जरिए बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से जीत दर्ज कर यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश करेगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांकीपुर जैसी भाजपा की मजबूत सीट पर जीत हासिल करना जन सुराज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह परिणाम पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में राजनीतिक बदलाव और नए विकल्प की बात करते रहे हैं। उनकी यह जीत उनके अभियान को नई ताकत दे सकती है।

वहीं, भाजपा के लिए यह हार कई सवाल खड़े कर रही है। पार्टी ने इस सीट पर पहले अभिषेक सिन्हा ‘बंटी’ को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनके चुनाव लड़ने में असमर्थता जताने के बाद अंतिम समय में नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया। उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब भाजपा संगठन इस हार की समीक्षा करने की तैयारी में है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जनादेश को स्वीकार करते हुए कहा है कि पार्टी परिणामों की समीक्षा करेगी और कमियों को दूर करने का प्रयास करेगी। हालांकि, उपचुनाव में मिली हार ऐसे समय में आई है जब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह भाजपा का पहला विधानसभा उपचुनाव था। ऐसे में इस परिणाम को पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशांत किशोर की जीत से बिहार विधानसभा में अब जन सुराज पार्टी की आवाज भी सुनाई देगी। पहली बार विधायक बने प्रशांत किशोर के सामने अब अपने चुनावी वादों को सदन में उठाने और जनता के मुद्दों पर काम करने की चुनौती होगी। वहीं, भाजपा को अपने संगठन, रणनीति और उम्मीदवार चयन पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। एक ओर जहां प्रशांत किशोर ने अपनी पहली चुनावी परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है, वहीं भाजपा के अभेद्य माने जाने वाले किले के टूटने से प्रदेश की सियासी तस्वीर पर इसका असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।

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