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PATNA पटना: राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी की सक्रिय नेता रही रोहिणी आचार्य द्वारा अचानक राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से दूरी बनाने के फैसले ने बिहार की सियासत में नई हलचल मचा दी है। इस मुद्दे पर अब बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “लालू परिवार का आंतरिक मामला” बताते हुए कहा कि यह एक चिंताजनक स्थिति है और परिवार को टूटने से बचाना चाहिए। दिलीप जायसवाल ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “यह लालू यादव के परिवार का अंदरूनी मामला है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि परिवार टूटना नहीं चाहिए। अगर पूरा परिवार किसी एक व्यक्ति की वजह से बिखर रहा है, तो यह ठीक नहीं है। लालू यादव और राबड़ी देवी को इस परिवार को संभालना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह परिवार का निजी मामला है, इसलिए इस पर राजनीति करना उचित नहीं होगा।
रोहिणी आचार्य, जो अक्सर सोशल मीडिया पर सरकार और विपक्ष दोनों पर मुखर रहती थीं, ने दो दिन पहले एक पोस्ट में राजनीति छोड़ने और परिवार से दूरी बनाने का ऐलान किया था। इसके बाद RJD के भीतर और बाहर दोनों जगह तरह-तरह की चर्चाएँ शुरू हो गईं। रोहिणी आचार्य लंबे समय से तेजस्वी यादव की राजनीतिक दिशा और परिवार में चल रहे विवादों को लेकर परेशान बताई जा रही थीं, हालांकि उन्होंने अपने निर्णय का सीधा कारण सार्वजनिक नहीं किया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का बयान इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद एक अलग चीज है, लेकिन परिवार का बिखरना किसी भी समाज के लिए पीड़ादायक होता है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि लालू यादव और राबड़ी देवी को आगे बढ़कर परिवार में समरसता स्थापित करनी चाहिए। जायसवाल ने यह भी कहा कि रोहिणी आचार्य एक समझदार और संवेदनशील महिला हैं, और उनका इस तरह परिवार से अलग होना चिंता का विषय है।
इस बीच, RJD की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि परिवार पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है और इस फैसले ने माहौल को और गंभीर बना दिया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी के कदम से पार्टी की छवि और अंदरूनी एकजुटता दोनों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव के सबसे मजबूत समर्थकों में मानी जाती थीं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। कई यूजर्स ने रोहिणी को राजनीतिक दबाव और पारिवारिक संघर्ष का शिकार बताया, जबकि कुछ ने इसे राजद परिवार की लंबे समय से चली आ रही आंतरिक कलह का परिणाम कहा है। कुल मिलाकर, रोहिणी आचार्य का परिवार और राजनीति से दूरी बनाने का फैसला सिर्फ राजद ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजरें लालू यादव परिवार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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