बिहार

भाजपा अध्यक्ष दिलीप जयसवाल ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्शों और ‘सेवा तीर्थ’ PMO कॉम्प्लेक्स पर जताई अपनी सोच

SHIDDHANT
2 Dec 2025 10:19 PM IST
भाजपा अध्यक्ष दिलीप जयसवाल ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्शों और ‘सेवा तीर्थ’ PMO कॉम्प्लेक्स पर जताई अपनी सोच
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Bihar बिहार: भाजपा अध्यक्ष दिलीप जयसवाल ने कहा कि उनका संगठन और वे व्यक्तिगत रूप से प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्शों पर चलने का प्रण लेते हैं। उन्होंने बताया कि उस समय महात्मा गांधी के आह्वान पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद जेल भी गए और किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। जयसवाल ने कहा कि इस प्रेरणा से ही पार्टी ने ‘स्टैच्यू ऑफ विज़डम’ को 60 फीट ऊँचा बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मूर्ति न केवल भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि युवाओं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी होगी। जयसवाल ने कहा, “हम चाहते हैं कि इस मूर्ति के माध्यम से लोगों में राष्ट्रसेवा और नेतृत्व की भावना को बढ़ावा मिले। डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सादगी, समर्पण और मेहनत हर नागरिक के लिए उदाहरण है।

इसके साथ ही, उन्होंने नए PMO कॉम्प्लेक्स का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखे जाने के निर्णय पर भी प्रकाश डाला। जयसवाल ने कहा, “जब मैं भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना, तब मैंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी ऑफिस को सेवा तीर्थ बनाना चाहिए। इसका अर्थ है कि जो भी लोग यहां आते हैं, उन्हें सम्मान और स्वागत का अनुभव हो। यही भावना प्रधानमंत्री कार्यालय में भी दिखाई दे रही है। जयसवाल ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ का उद्देश्य केवल एक नाम नहीं है, बल्कि यह जनसेवा की भावना और नागरिकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी और सरकार का दृष्टिकोण यही है कि लोगों को प्रशासनिक और सामाजिक तौर पर सहज, सम्मानजनक और सहयोगात्मक अनुभव मिले।

भाजपा अध्यक्ष ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और पार्टी कार्यालयों में सेवा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना, कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम लोकतंत्र की वास्तविक भावना को जनता तक पहुँचाने में मदद करते हैं। जयसवाल ने कहा, “हमारा प्रयास है कि भारत के सभी नागरिक, चाहे किसी भी क्षेत्र या वर्ग से हों, उन्हें सरकारी संस्थाओं और पार्टी के माध्यम से सम्मान और सेवाभाव का अनुभव हो। यह न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पहलें देश के युवाओं को प्रेरित करेंगी और उन्हें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करेंगी। ‘सेवा तीर्थ’ और ‘स्टैच्यू ऑफ विज़डम’ जैसे कदम यह संदेश देते हैं कि राष्ट्रसेवा, नेतृत्व और जनता के प्रति सम्मान ही सच्ची शक्ति और प्रगति का मूल आधार हैं।
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