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रोहिणी की नाराजगी पर भाजपा का वार राजद के टिकट चयन पर सवाल

Kavita2
12 Sept 2026 12:30 PM IST
रोहिणी की नाराजगी पर भाजपा का वार राजद के टिकट चयन पर सवाल
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पटना। विधान परिषद चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन को लेकर राष्ट्रीय जनता दल में उठे सवाल अब राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन गए हैं। लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा टिकट वितरण पर आपत्ति जताए जाने के बाद भाजपा ने राजद नेतृत्व को घेरा है। राजद छोड़कर भाजपा में आए मृत्युंजय तिवारी ने रोहिणी के बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग गुट एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं और राजद लगातार कमजोर हो रही है।

तिवारी ने कहा कि राजद की अंदरूनी स्थिति को लेकर उनकी आशंकाएं अब पार्टी से जुड़े लोगों के बयानों में भी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने रोहिणी की टिप्पणी को इसी संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनका दावा है कि टिकट वितरण पर उठे सवाल केवल प्रत्याशी चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संगठन में जारी मतभेदों को भी सामने लाते हैं। हालांकि, राजद के कमजोर होने और उसके भविष्य को लेकर तिवारी की टिप्पणियां राजनीतिक दावे हैं। इन्हें पार्टी की वास्तविक स्थिति का अंतिम आकलन नहीं माना जा सकता।

रोहिणी आचार्य की आपत्ति का केंद्र प्रत्याशियों के चयन और पुराने कार्यकर्ताओं को अवसर मिलने का सवाल बताया जा रहा है। उम्मीदवारों की सूची पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नए लोगों को प्राथमिकता मिलने और पुराने वफादार कार्यकर्ताओं की अनदेखी होने पर नाराजगी जताई है। लालू प्रसाद की बेटी होने के कारण उनकी टिप्पणी को राजनीतिक महत्व मिला है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया और चयन के लिए अपनाए गए सभी मानदंड स्पष्ट नहीं हैं।

रोहिणी के सवालों को भाजपा ने राजद नेतृत्व के खिलाफ इस्तेमाल किया है। तिवारी ने दावा किया कि पार्टी के भीतर मौजूद गुट अब खुलकर एक-दूसरे की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि राजद अब बचने वाली नहीं है। यह बयान विपक्षी दल पर तीखा राजनीतिक हमला है। उपलब्ध जानकारी में इस दावे के समर्थन में सदस्य संख्या, संगठनात्मक स्थिति या जनसमर्थन से जुड़े आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसलिए पार्टी के भविष्य को लेकर इस निष्कर्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।

मृत्युंजय तिवारी का बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह पहले राजद के प्रवक्ता रहे हैं। पार्टी छोड़ने के बाद वह भाजपा में शामिल हुए और राजद की कार्यशैली पर आलोचनात्मक रुख अपनाते रहे हैं। अगस्त में संगठनात्मक इकाइयों के पुनर्गठन से जुड़े घटनाक्रम पर भी उन्होंने कहा था कि राजद में सबकुछ ठीक नहीं है और इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ी। उनकी मौजूदा टिप्पणी पहले व्यक्त की गई नाराजगी की अगली कड़ी के रूप में देखी जा सकती है।

टिकट वितरण किसी भी राजनीतिक दल के लिए उम्मीदवार चुनने के साथ कार्यकर्ताओं को संदेश देने का निर्णय भी होता है। लंबे समय से संगठन में काम कर रहे लोगों की अपेक्षाएं और नए चेहरों को अवसर देने की रणनीति के बीच संतुलन बनाना चुनौती हो सकता है। राजद के मामले में रोहिणी की टिप्पणी ने इसी संतुलन पर सवाल खड़ा किया है। हालांकि, किसी चयन से असहमति और पूरे संगठन में व्यापक संकट होने का दावा अलग बातें हैं। दोनों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रोहिणी की आपत्ति को लेकर राजद के भीतर कितने नेताओं या कार्यकर्ताओं ने औपचारिक रूप से समर्थन जताया है। उपलब्ध विवरण में किसी सामूहिक विरोध, बैठक या प्रत्याशी बदलने के निर्णय की जानकारी नहीं है। इसलिए नाराजगी को व्यापक विद्रोह के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। सार्वजनिक बयान से मतभेद सामने आया है, लेकिन उसका संगठन पर कितना असर पड़ेगा, यह पार्टी की प्रतिक्रिया और आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

इस विवाद में राजद नेतृत्व का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। प्रत्याशियों का चयन किन आधारों पर हुआ, पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका कैसे तय की गई और उठी आपत्तियों पर पार्टी क्या रुख अपनाती है, इन सवालों के जवाब घटनाक्रम को पूरा संदर्भ देंगे। उपलब्ध सामग्री में रोहिणी की टिप्पणी और तिवारी के आरोपों पर राजद की विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए अभी यह नहीं कहा जा सकता कि नेतृत्व ने शिकायतों को स्वीकार किया है या उन्हें खारिज कर दिया है।

भाजपा की प्रतिक्रिया ने टिकट वितरण से जुड़े सवाल को प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप में बदल दिया है। तिवारी ने अंदरूनी मतभेदों को राजद की कमजोरी बताया है। दूसरी ओर, किसी पार्टी के भीतर चयन पर सवाल उठना अपने आप में उसके राजनीतिक प्रभाव के खत्म होने का प्रमाण नहीं है। चुनावी प्रदर्शन, संगठन की सक्रियता और नेतृत्व की निर्णय क्षमता जैसे कई पहलू भी उसकी स्थिति तय करते हैं। मौजूदा विवाद का वास्तविक असर आगे सामने आएगा।

अभी घटनाक्रम का केंद्र रोहिणी आचार्य की आपत्ति और उस पर मृत्युंजय तिवारी की प्रतिक्रिया है। टिकट बंटवारे पर उठे सवालों के बीच राजद नेतृत्व का अगला कदम महत्वपूर्ण रहेगा। पार्टी अपनी चयन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देती है या आपत्तियों पर कोई अन्य निर्णय लेती है, इससे आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा ने इस मुद्दे पर हमला तेज किया है, जबकि राजद के भविष्य को लेकर तिवारी का बयान राजनीतिक दावा बना हुआ है।

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