बिहार

Bihpur: इ. शैलेंद्र का 'तीसरा तिलक', 74 साल के चुनावी इतिहास में चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल

nidhi
7 May 2026 9:41 AM IST
Bihpur: इ. शैलेंद्र का तीसरा तिलक, 74 साल के चुनावी इतिहास में चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल
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74 साल के चुनावी इतिहास में चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल
Bihapur : भागलपुर जिले की चर्चित बिहपुर विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक इ. कुमार शैलेंद्र ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर दी है। एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी इ. शैलेंद्र वर्ष 2025 के चुनाव में जीत दर्ज कर लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार विधायक बने हैं। उन्होंने महागठबंधन समर्थित वीआईपी प्रत्याशी को करीब 30 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराकर बड़ी जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही इ. शैलेंद्र ने बिहपुर विधानसभा के राजनीतिक इतिहास में अपना नाम मजबूत तरीके से दर्ज करा लिया है।
तीसरी बार विधायक बने इ. शैलेंद्र
बिहपुर विधानसभा सीट के इतिहास पर नजर डालें तो यहां बहुत कम नेताओं को तीन बार विधायक बनने का मौका मिला है। इ. शैलेंद्र इससे पहले वर्ष 2010 और 2020 में भी विधायक चुने जा चुके हैं। अब 2025 में जीत के साथ वे तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं।हालांकि लगातार तीन बार विधायक बनने का रिकॉर्ड अब भी शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के नाम दर्ज है। बुलो मंडल वर्ष 2000, फरवरी 2005 और नवंबर 2005 में लगातार तीन बार बिहपुर से विधायक बने थे। वर्तमान में वे गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और चौथी बार विधायक बने हैं।
चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हुए शैलेंद्र
लगातार दो बार विधायक बनने वाले नेताओं की सूची में अब इ. शैलेंद्र का नाम भी जुड़ गया है। उनसे पहले प्रभुनारायण राय, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और ब्रह्मदेव मंडल लगातार दो-दो बार बिहपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इ. शैलेंद्र की लगातार जीत यह दिखाती है कि क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक उनकी सक्रियता का लाभ भाजपा को लगातार मिल रहा है।
1951 में था अलग नाम
बिहपुर विधानसभा का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1951 में हुए पहले चुनाव के समय इस क्षेत्र का नाम “नवगछिया सह बिहपुर विधानसभा” था। बाद में 1957 के चुनाव से इसका नाम सिर्फ “बिहपुर विधानसभा क्षेत्र” कर दिया गया। तब से लेकर अब तक इस सीट पर कांग्रेस, भाकपा, जनता दल, राजद और भाजपा जैसी कई पार्टियों का कब्जा रहा है। लेकिन पिछले डेढ़ दशक में भाजपा ने यहां अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार की है।
बिहपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास
वर्ष 1951 में कांग्रेस के कुमार रघुनंदन प्रसाद ने पहली जीत दर्ज की थी।
वर्ष 1957, 1969 और 1972 में भाकपा के प्रभुनारायण राय ने जीत हासिल कर मजबूत पहचान बनाई।
1967 में जनसंघ के ज्ञानेश्वर यादव विजयी रहे।
1980 और 1985 में कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने लगातार दो चुनाव जीते।
1990 और 1995 में जनता दल के ब्रह्मदेव मंडल ने जीत दर्ज की।
इसके बाद राजद के दौर में शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने 2000 और 2005 में लगातार जीत हासिल की।
वर्ष 2010 में भाजपा के इ. कुमार शैलेंद्र ने पहली बार इस सीट पर कमल खिलाया।
2015 में बुलो मंडल की पत्नी राजद की वर्षा रानी ने जीत दर्ज की (उस समय बुलो मंडल भागलपुर के राजद के सांसद थे)।
वर्ष 2020 और 2025 में भाजपा के इ. कुमार शैलेंद्र ने फिर वापसी करते हुए लगातार दो चुनाव जीत लिए।
2025 में सबसे अधिक मतदान
बिहपुर विधानसभा में वर्ष 2025 का चुनाव कई मायनों में खास रहा। इस बार यहां 64.66 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले कई चुनावों की तुलना में अधिक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बढ़े मतदान का फायदा भाजपा प्रत्याशी इ. शैलेंद्र को मिला। अब लगातार तीसरी जीत के बाद इ. शैलेंद्र का कद न सिर्फ बिहपुर बल्कि भागलपुर और नवगछिया की राजनीति में भी काफी बढ़ गया है।
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