बिहार

सामान्य से कम बारिश के बावजूद बिहार की प्रमुख नदियां उफान पर

Kavita2
22 Aug 2026 11:17 AM IST
सामान्य से कम बारिश के बावजूद बिहार की प्रमुख नदियां उफान पर
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पटना। बिहार में इस वर्ष अब तक बारिश सामान्य से कम हुई है, लेकिन राज्य की प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की आशंका बढ़ा दी है। गंगा, सोन, कोसी, गंडक, सरयू और बागमती समेत कई नदियां उफान पर हैं। नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

पटना, भोजपुर, बक्सर, सिवान, रोहतास, भागलपुर, बेगूसराय और पश्चिमी चंपारण समेत कई जिलों में नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। कई स्थानों पर नदियों का पानी खेतों और संपर्क मार्गों की ओर बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल है।

कम बारिश के बावजूद बढ़ी मुश्किल

इस वर्ष राज्य में अब तक बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। इसके बावजूद नदियों के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। पहाड़ी इलाकों में बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी का असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है।

नदियों में पानी बढ़ने का असर सबसे पहले तटवर्ती और निचले इलाकों में दिखाई देता है। खेतों में पानी पहुंचने से फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ जाती है, जबकि संपर्क मार्गों पर पानी आने से गांवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

रोहतास में सोन नदी का जलस्तर बढ़ा

रोहतास जिले में शुक्रवार को सोन नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई। नौहट्टा क्षेत्र में पहाड़ी नदियों का पानी तेजी से बढ़ा, जिसके बाद रोहतास-यदुनाथपुर मुख्य मार्ग पर पानी बहने लगा।

स्थानीय जानकारी के मुताबिक, सड़क पर करीब तीन से चार फीट तक पानी बहने लगा, जिससे इस मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया। सड़क पर पानी का बहाव बढ़ने के बाद लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।

मुख्य मार्ग पर पानी आने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ गई है। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो संपर्क व्यवस्था पर और अधिक असर पड़ने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

गंगा किनारे के जिलों में बढ़ी चिंता

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर पटना, भोजपुर, बक्सर, भागलपुर और बेगूसराय जैसे जिलों में देखा जा रहा है। नदी किनारे बसे लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में पानी पहुंचने का डर सता रहा है।

गंगा के किनारे बड़ी संख्या में गांव और कृषि क्षेत्र स्थित हैं। जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर खेतों में पानी भरने से किसानों को नुकसान हो सकता है। वहीं, नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ सकती है।

प्रशासन की ओर से तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

कोसी और गंडक का भी बढ़ा दबाव

उत्तर बिहार में कोसी और गंडक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भी चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी चंपारण और आसपास के क्षेत्रों में गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। कोसी के प्रभाव वाले इलाकों में भी ग्रामीण नदी के बढ़ते पानी को लेकर सतर्क हैं।

कोसी को बिहार की सबसे चुनौतीपूर्ण नदियों में माना जाता है। नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव होने पर तटबंधों और निचले इलाकों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जलस्तर की लगातार निगरानी जरूरी हो जाती है।

बागमती और सरयू नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से भी संबंधित जिलों में बाढ़ की आशंका बढ़ी है। सिवान और आसपास के क्षेत्रों में नदी के पानी की स्थिति पर स्थानीय प्रशासन नजर बनाए हुए है।

किसानों की बढ़ी चिंता

नदियों के बढ़ते जलस्तर का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ने की आशंका है। कई तटवर्ती क्षेत्रों में खेत नदी के करीब हैं। जलस्तर बढ़ने पर खेतों में पानी भर सकता है, जिससे धान समेत अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है।

बारिश कम होने के बावजूद बाढ़ की स्थिति बनने से किसानों के सामने दोहरी चुनौती पैदा हो गई है। एक ओर कम बारिश से कृषि प्रभावित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर नदियों का पानी खेतों में पहुंचने से खड़ी फसल को नुकसान होने का खतरा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ तो खेतों और संपर्क मार्गों पर इसका असर और बढ़ सकता है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

राज्य में नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों ने निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में जलस्तर की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा जा रहा है।

संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल तटवर्ती आबादी की सुरक्षा और संपर्क मार्गों को सुरक्षित रखना है।

आने वाले दिनों पर टिकी नजर

बिहार में बाढ़ की स्थिति काफी हद तक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश और ऊपरी इलाकों से आने वाले पानी पर निर्भर करती है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो राज्य की नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है।

वहीं, बारिश में कमी आने और ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह घटने पर स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल कई जिलों में प्रशासन और ग्रामीण दोनों नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

सामान्य से कम बारिश के बावजूद गंगा, सोन, कोसी, गंडक, सरयू और बागमती जैसी प्रमुख नदियों का उफान बिहार के लिए चिंता का विषय बन गया है। रोहतास में सोन नदी के पानी से मुख्य मार्ग पर आवागमन प्रभावित होना स्थिति की गंभीरता का संकेत है। आने वाले दिनों में जलस्तर में होने वाला बदलाव तय करेगा कि यह स्थिति कितनी गंभीर होती है और कितने इलाकों तक इसका असर पहुंचता है।

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