
Bihar बिहार: इस वर्ष कोसी नदी में समय से पहले ही लाल पानी (नया पानी) उतर आने से जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। नदी के इस बदलते व्यवहार के बाद इलाके में बाढ़ की आशंका तेज हो गई है और ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। बाढ़ की उलटी गिनती शुरू होने की बात भी स्थानीय लोग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि बिहार में सरकारी स्तर पर बाढ़ की अवधि 1 जून से 31 अक्टूबर तक मानी जाती है, लेकिन इस बार स्थिति सामान्य समय से पहले ही बदलती नजर आ रही है। कोसी नदी में जल प्रवाह बढ़ने के साथ ही कई इलाकों में संभावित खतरे की आशंका गहराने लगी है।
कोसी नदी के किनारे बसे तेलिहार, डुमरी दुर्गा स्थान, ब्राह्मण टोला पचाठ और इतमादी के गांधीनगर क्षेत्र के लोग विशेष रूप से चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने और धारा तेज होने पर हर साल कटाव का खतरा मंडराने लगता है, जिससे घरों और खेतों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही कोसी नदी उफान पर आती है, वैसे ही किनारे बसे गांवों पर कटाव का संकट बढ़ जाता है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते सुरक्षा उपाय करने और तटबंधों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अभी से तैयारी नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि, ग्रामीणों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।





